देश/विदेश

अर्ध कुंभ से पहले हरिद्वार को पवित्र नगरी घोषित किए जाने की मांग

2027 में हरिद्वार में होगा अर्ध कुंभ, ब्रिटिश काल में 1916 में गंगा घाटों के लिए बनाए गए थे नियम , वही नियम फिर से लागू करने की मांग

सर्जना शर्मा

अगले वर्ष 2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ होने जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार हरिद्वार ऋषिकेश कॉरिडोर निर्माण के लिए काम शुरू कर चुकी है। करोड़ों तीर्थ यात्रियों की आवाजाही को हरिद्वार सहन कर ले इस दिशा में योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। एक ओर प्रशासनिक और ढांचागत तैयारियां चल रही हैं तो दूसरी और सात पवित्र नगरियों में एक हरिद्वार को ( जिसका नाम पुराणों धर्म ग्रंथों में मायापुरी है) पुष्कर धामी सरकार गंगा नगरी को "सनातन पवित्र नगरी" घोषित कर सकती है। पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उनकी सरकार हरिद्वार ऋषिकेश को सनातन पवित्रता बनाए रखने के लिए काम करेगी और इन्हें धार्मिक पवित्र नगरी घोषित किए जाने पर विचार करेगी ताकि पवित्रता बनी रहनी चाहिए ।

रविवार को हुई बैठक में गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि कुंभ से पहले हरिद्वार ऋषिकेश कुंभ क्षेत्र में गंगा घाटों पर गैर सनातनी लोगों के प्रवेश पर सरकार प्रतिबंध लगाए। गौतम ने अपने बयान में तीर्थ गंगा हरिद्वार नगर पालिका और निगम के बायलॉज का हवाला दिया है। पालिका बायलॉज के अनुसार करीब सौ साल पहले से ये नियम हर की पौड़ी और आसपास के स्नान घाटों पर लागू है कि यहां गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी है। इस बायलॉज के विस्तार करके इसे 105 गंगा घाटों पर लागू किया जाना चाहिए ताकि यहां गंगा की स्वच्छता, आस्था, श्रद्धा बनी रहे इसलिए ये सनातन परंपरागत नियम भी गंगा के आसपास क्षेत्र में लागू किया जाना चाहिए ।

गंगा के दोनों तरफ ही मठ,अखाड़े, आश्रम है जोकि सनातन रक्षक माने जाते है। गंगा घाटों पर गैर हिंदू प्रवेश पर पाबंदी को लेकर संत समाज में भी स्वर उठने लगे है। धीरे धीरे संत समाज भी इस पर अपने बयान देने लगे है। उनका कहना है कि गंगा, सनातन, की पवित्रता बनाए रखने के लिए नगर निगम , धामी सरकार जो भी कदम उठाएगी उसका वे भरपूर समर्थन करते है क्योंकि ये करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का सवाल है।

प. मदन मोहन मालवीय ने एक बड़े जनांदोलन के बाद ब्रिटिश हुकूमत के साथ 1916 में हरिद्वार ऋषिकेश के संदर्भ में एक समझौता किया था और उस समझौते के अनुसार गंगा की धारा को अविरल बहने के साथ साथ हरिद्वार ऋषिकेश नगरी की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ नियम बनाए गए थे, जिन्हें बाद में नगर पालिका की नियमावली में शामिल किया गया था। इन नियमों में एक नियम ये भी था कि हर की पैड़ी सहित गंगा के घाटों में गैर हिंदू का प्रवेश वर्जित किया गया था।

इस नियम का पालन आज भी किया जाता रहा है। हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और हिन्दू धर्मशालाएं, अखाड़े, मठ,आश्रम हुआ करते थे। जहां गैर हिंदुओं के प्रवेश अथवा रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं है। ये सभी स्थान पावन गंगा के घाटों के एक किमी के दायरे में ही है। करीब सौ साल पहले जब ये नियम बने तब हरिद्वार ऋषिकेश पालिका क्षेत्र परिधि में कुछ ही पक्के घाट थे, चूंकि अब निगम क्षेत्र का दायरा बढ़ गया है इसलिए पालिका के पुराने बायलॉज का भी विस्तार हो चुका है । सनातन संगठन संत समाज और अखाड़ा परिषद ये मांग करती आयी है कि हरिद्वार ऋषिकेश को पवित्र नगरी घोषित किया जाए और मांस मदिरा के सेवन पर रोक लगायी जाए।

SCROLL FOR NEXT