नयी दिल्ली : भारत मंडपम में 10 जनवरी से शुरू होने वाले 53वें विश्व पुस्तक मेले में पहली बार सभी दर्शकों की मुफ्त एंट्री होगी। अभी तक स्कूल यूनिफार्म में आने वाले छात्रों को ही मुफ्त एंट्री मिलती थी। 10 से 18 जनवरी तक चलने वाले मेले में 20 लाख दर्शकों के आने की उम्मीद है उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। थीम 75 सालों के भारतीय सैन्य इतिहास,शौर्य व विवेक रखी गई है तो थीम पवेलियन, आईएमए देहरादून के द्वार पर आधारित है। मेले में कतर सम्मानित अतिथि और स्पेन को फोकस देश है। रूस, जापान, ईरान, फ्रांस आदि 35 से अधिक देशों के हजार से लेखक और प्रकाशक शामिल हो रहे हैं। पहली बार जापान से 30 लोगों को एक दल इंडिया -जापान पब्लिशर्स मीट कार्यक्रम में भाग लेने आ रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ, राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट न्यास (एनबीटी) के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल युवराज मलिक ने बताया, गणतंत्र दिवस से पहले ही दिल्ली देशभक्ति के रंग में रंगने वाली है। हर आयु वर्ग के किताब प्रेमियों को ध्यान में रखते हुए पहली बार विश्व पुस्तक मेला एक नए अंदाज में आ रहा है। सभी के एंट्री फ्री होगी। थीम इंडियन मिलिट्री हिस्ट्री: वालोर, विजडम एट 75 रखी गई है। दुनिया को भारतीय सेना के 75 सालों के इतिहास, शौर्य व विवेक से दुनिया को रूबरू करवाना है। भारतीय सेना से संबंधित 500 पुस्तकों के अलावा, जवानों द्वारा लिखित रचनाओं का विमोचन भी किया जाएगा। इसका मकसद, भारतीय सेना को नमन और वीर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देना है। दर्शकों खासकर युवा व बच्चे पहली बार मेले में आर्मी, एयरफोर्स, नेवी बैंड की प्रस्तुति देख पाएंगे।
तेजस, आईएनएस विक्रांत, अर्जुन टैंक देखें
युवाओं को भारतीय सेनाओं से जोड़ने के मकसद से, थीम पवेलियन में सेना की वीरता, इतिहास पर आधारित सौ से अधिक कार्यक्रम होंगे। दर्शक, सूडान ब्लॉक, एनडीए खड़कवासला के अलावा भारतीय सेना के थल, जल और वायु सेना की ताकत, अर्जुन टैंक, लड़ाकू विमान, तेजस, आईएनएस विक्रांत के मॉडल दिखेंगे। भारतीय सेना के अधिकारी युवाओं को सर्जिकल व एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताएंगे। वहीं, 1947 में कश्मीर के बड़गाव में भारतीय सैनिकों और पाकिस्तानी कबायलियों के बीच पहला युद्ध, 1962 1965,1971, 1999 में कारगिल युद्ध से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर की भी जानकारी मिलेगी।
वंदेमातरम और सरदार पटेल पर प्रदर्शनी
मेले में वंदेमातरम के 150 साल पर विशेष प्रस्तुतियां होंगी। जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर विशेष प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएंगी। मेले में 600 से अधिक आयोजनों में 1000 से अधिक वक्ता संवाद करेंगे। इसके अलावा 35 देशों से 1000 से अधिक प्रकाशक, लेखक और 300 से अधिक स्टॉल होंगे।
सेना से जुड़ने की जानकारी भी मिलेगी
मेले में भारतीय सेना के साथ डेढ़ सौ साल पुराना राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा थिंक टैंक यानी यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया भी आ रहा है। यह युवाओं को भारत की थल,वायु और जल सेना की वर्दी, रैंक, मैडल से लेकर उनके कामकाज की सही जानकारियां देगा। प्रदर्शनी में वर्दी, मैडल, रैँक के अलावा तीनों सेेनाएं किस रंग के कॉरपेट बिछाती है, भी दर्शाया जाएगा। युवाओं को किताबों, फोटो, ऑडियो-वीडियो के माध्यम से भारतीय सैनिक और सैन्य अधिकारी बनने के अवसर, परीक्षा, योग्यता, वेतन, सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।
वीरता में हिमाचल सबसे ऊपर, चार परमवीर चक्र भी मिले
दर्शक हिमाचल प्रदेश और सेना का अटूट रिश्ता देखेंगे। छोटे से प्रदेश के 1700 सैनिक सरहदों की रखवाली में शहीद तो 1200 से अधिक को वीरता पुरस्कार मिल चुका है। जबकि 21 परमवीर चक्र में से चार हिमाचल को मिले हैं। जिसमें, आजाद भारत, 1947 में भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को बचाने के बड़गाव युद्ध में शहीद देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, 1962 में भारत-चीन के लद्दाख युद्ध में शिमला के मेजर (बाद में लेफ्टिनेंट कर्नल)धन सिंह थापा, कारिगल युद्ध के हीरो कैप्टन विक्रम बत्तरा और सेवाकाल में राइफलमैन संजय कुमार को परमवीर चक्र मिला है। कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 सैनिक शहीद हुए थे, जिसमें,कैप्टन सौरभ कालिया भी शामिल हैं।