दिल्ली, इंद्राणी: भारत में सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर उम्र-आधारित प्रतिबंधों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए—यह कहना है देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का। हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में इस विषय को प्रमुखता से उठाया गया है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। कम उम्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म तक बिना किसी नियंत्रण के पहुंच से लत, एकाग्रता की कमी और हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आने का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में सोशल मीडिया के उपयोग पर उम्र के अनुसार नियंत्रण जरूरी हो गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अक्सर इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और किशोरों पर पड़ता है। इसी को देखते हुए सोशल मीडिया कंपनियों के लिए उम्र सत्यापन प्रणाली लागू करने और उम्र के अनुरूप डिफॉल्ट सेटिंग्स अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है।
इसके साथ ही सर्वेक्षण में अभिभावकों की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। परिवारों को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर निगरानी रखने और उन्हें ऑफलाइन गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित करने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे कई देशों में पहले से ही सोशल मीडिया पर उम्र-आधारित नियंत्रण लागू हैं या इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। भारत में फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं है, लेकिन मुख्य आर्थिक सलाहकार का यह सुझाव भविष्य में डिजिटल नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभा सकता है, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।