नई दिल्ली में आयोजित SMRSC 2026 के तीसरे संस्करण ने साफ संकेत दिया कि भारत अब सिर्फ चिकित्सा तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का अग्रदूत बन रहा है। भारत मंडपम में 9 अप्रैल से शुरू हुए इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 1500 से अधिक डॉक्टरों और 250 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, जहां सर्जरी के बदलते स्वरूप की झलक देखने को मिली।
SS Innovations International द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में लाइव टेली-सर्जरी, वैज्ञानिक सत्र और अत्याधुनिक तकनीकी प्रदर्शन ने यह साबित किया कि चिकित्सा विज्ञान अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। खास बात यह रही कि यहां 15 लाइव टेली-सर्जरी और 14 लाइव सर्जरी का प्रदर्शन किया गया, जिसमें Mantra-3 और MantrAsana सिस्टम्स की क्षमताएं सामने आईं।
सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। प्रोजेक्ट विमाना और प्रोजेक्ट ओपेरियन। प्रोजेक्ट विमाना एक क्रांतिकारी बैटलफील्ड सर्जिकल सिस्टम है, जिसे स्वायत्त ड्रोन के जरिए युद्ध या आपदा क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। इसमें लगे अत्याधुनिक रोबोटिक आर्म्स की मदद से दूर बैठे सर्जन भी गंभीर मरीजों का ऑपरेशन कर सकते हैं। SSI Mantra के कमांड सेंटर से संचालित यह तकनीक दुर्घटना और इलाज के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास है।
वहीं प्रोजेक्ट ओपेरियन ने ऑपरेशन थिएटर की पारंपरिक अवधारणा को बदलते हुए एक मोबाइल, प्लेटफॉर्म-अज्ञेय ऑपरेटिंग रूम की परिकल्पना पेश की। इसकी 360 डिग्री एक्सेस और टेली-सर्जरी क्षमता इसे अस्पतालों के साथ-साथ दूरदराज और आपदा क्षेत्रों में भी उपयोगी बनाती है।
सम्मेलन में SSI AVTARA ह्यूमनॉइड रोबोट का अनावरण भी चर्चा में रहा, जिसे स्वास्थ्य सेवा, रक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मानव क्षमता बढ़ाने के लिए विकसित किया जा रहा है।
डॉ सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि इन तकनीकों का उद्देश्य सर्जरी को सुलभ बनाना है, जबकि Mylswamyr Annadurai ने जोर दिया कि नवाचार तभी सार्थक है, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। प्रतापराव जाधव ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया।
कुल मिलाकर, SMRSC 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि सर्जरी का भविष्य अब अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक के जरिए हर उस स्थान तक पहुंचेगा, जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है।