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राज्यसभा में बदलेगा समीकरण! 37 सीटों के चुनाव से बदलेगी तस्वीर

राज्यसभा में नई तस्वीर: 37 सीटों के चुनाव से बदलेंगे समीकरण

सर्जना शर्मा

राज्य सभा की 37 सीटों पर आगामी 16 मार्च को चुनाव होगा। केंद्रीय चुनाव आयोग ने बुधवार को चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। चुनाव में सीटों का बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। जब राज्यों में राजनीतिक दलों की संख्या घटती बढती है तो उसका असर राज्य सभा पर पड़ता है। हाल के विधानसभा चुनावों ने एनडीए की स्थिति मजबूत की है। महाराष्ट्र में एनडीए के 228 विधायक हैं (भाजपा 131, शिवसेना-शिंदे 57, एनसीपी -अजित 40), जो 7 सीटों में से 4-5 जीत सकता है यानी पहले से ज्यादा बिहार में एनडीए को एक एक्स्ट्रा सीट मिल सकती है, जहां पहले से 3 थे, अब 4 होंगे आंध्र प्रदेश में 3 का लाभ हो सकता है। गुजरात में एक, ओडिशा में दो, राजस्थान में एक ये लाभ विधानसभा में राजनीतिक दलों के पास जितनी ज्यादा सीटें उसको उतना ही लाभ । जैसे एनडीए ने 2025 में महाराष्ट्र और बिहार चुनाव जीता तो लाभ होगा।

ये साल संसद के ऊपरी सदन में बदलाव का साल होगा पूरे साल में करीब 72 से 75 सीटें खाली हो रही हैं, जो अप्रैल, जून, जुलाई और नवंबर में सांसदों की 6 साल की अवधि पूरी होने से खाली हो रही है। अभी फरवरी 2026 में राज्यसभा की कुल 245 सीटों में बीजेपी की 103 हैं, कांग्रेस की 27, तृणमूल कांग्रेस की 12, आम आदमी पार्टी की 10, डीएमक़े की 10, बीजेडी की 7, वाईएसआरसीपी की 5 और एआईएडीएमके की 7 सीटें हैं. नामित सदस्य 7 हैं और एनडीए की कुल की ताकत 121 के आसपास है, जबकि Iजबकि इंडिया ब्लॉक के पास 80 सीटें हैं। एनडीए को 7 से 9 सीटों का फायदा होने की उम्मीद है। वहीं इंडिया गठबंधन को को 5 सीटों का नुकसान हो सकता है।

सबसे पहले 16 मार्च 2026 को 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जो 10 राज्यों से हैं । महाराष्ट्र से 7, ओडिशा से 4, तमिलनाडु से 6, पश्चिम बंगाल से 5, असम से 3, बिहार से 5, छत्तीसगढ़ से 2, हरियाणा से दो, हिमाचल प्रदेश से एक और तेलंगाना से दो ये सीटें अप्रैल में खाली हो रही है। साल के बाकी चुनावों में और 35-38 सीटें शामिल होंगी, जो कुल 22 राज्यों से हैं, जैसे उत्तर प्रदेश से 10, कर्नाटक से 4, गुजरात से 4, आंध्र प्रदेश से 4 सीटें हैं।

राज्यसभा की सीटों में विधानसभा की ताकत का पूरा गणित क्या है?

राज्यसभा के सदस्य (सांसद) राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायकों की वोटिंग से चुने जाते हैं। यानी, केंद्र में कौन सी पार्टी मजबूत होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हर राज्य की विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक हैं। अगर विधानसभा में आपकी पार्टी की ताकत बढ़ती है, तो राज्यसभा में भी आपकी सीटें बढ़ती हैं। राज्यसभा की सीटें हर राज्य में तय होती हैं ।जैसे महाराष्ट्र से 19 सीटें, लेकिन चुनाव साल दर साल कुछ सीटों पर होते हैं, जब पुराने सदस्य रिटायर होते हैं. चुनाव में जीतने के लिए, हर उम्मीदवार को एक निश्चित संख्या में वोट चाहिए, जिसे कोटा कहते हैं।

कोटा कैसे निकालते हैं?

फॉर्मूला बहुत सिंपल है: कोटा = (कुल विधायक) / (सीटें +1) +1.

राज्यसभा के सदस्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य चुनते है इसलिए हर राज्य में विधायकों की संख्या से कोटा तय होता है। यह इसलिए है कि हर सीट के लिए वोट बराबर बंटें और कोई पार्टी ज्यादा वोट से ज्यादा सीटें जीत सके। अगर किसी उम्मीदवार को कोटा से एक वोट भी कम मिला, तो वो हार जाता है। बिहार के उदाहरण से समझें: बिहार में कुल 243 विधायक हैं और 5 सीटों पर चुनाव होना है. कोटा 243 ÷ (5 + 1 = 6) = 40.5, फिर +1 = 41.5, लेकिन कुल मिला कर 42 वोट प्रति सीट। एनडीए के पास 202 विधायक हैं, तो 202 ÷ 42 ≈ 4.81 यानी 4 सीटें. पहले एनडीए की ताकत कम थी, तो 120 ÷ 42 ≈ 2.85 यानी सिर्फ 2-3 सीटें। लेकिन बिहार में एनडीए ने हाल के चुनावों में मजबूत पकड़ बनाई, इसलिए राज्यसभा में लाभ मिलेगा। अगर कोई विधायक क्रॉस-वोट करे या स्वतंत्र समर्थन दे तो पांचवी सीट भी एनडीए को मिल सकती है।

कौन सी पार्टियां घाटे या फायदे में रहेंगी?

कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक को सबसे ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि 5 से 6 सीटें कम हो सकती हैं। जैसे गुजरात में कांग्रेस की एक सीट खत्म हो सकती है। कर्नाटक में कांग्रेस को एक कम, बीजेडी की ओडिशा में 1-2 कम, वाईएसआरसीपी की आंध्र में 3 कम, सीपीआईएम की पश्चिम बंगाल से एक कम। ये पार्टियां जहां जहां विधानसभा में कमजोर हुईं हैं वहां सीटों का नुकसान होगा। लेकिन तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके को एक या दो सीट का फायदा हो सकता है।

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