तिरुवनंतपुरम : मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने ‘कॉन्फिडेंट ग्रुप’ के चेयरमैन सी जे रॉय की मौत के मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा है कि इस घटना के पीछे के वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए। माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन, राज्यसभा सदस्य ए.ए. रहीम और विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि रॉय की मौत के कारणों की जांच की जानी चाहिए।
यहां पत्रकारों से बातचीत में गोविंदन ने सवाल उठाया कि छापेमारी और ऐसी अन्य कार्रवाइयों के दौरान केंद्रीय एजेंसियां अधिक मानवीय तरीके से काम करने में असमर्थ क्यों हैं। उन्होंने दावा किया कि रॉय की मौत के बाद भी उनके कार्यालय पर छापेमारी जारी रही। रहीम ने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि क्या रॉय ‘‘केंद्रीय एजेंसियों की दबाव की रणनीति’’ से परेशान थे।
रहीम ने एक ‘फेसबुक’ पोस्ट में रॉय की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है। सतीशन ने कहा कि कारोबारी की मौत में जरूर कोई ‘‘राज’’ है और इस मामले की जांच की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘इस बात का पता ही नहीं चल पाया है कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने कारोबारी को किस तरह प्रताड़ित किया।’’ इस बीच, अभिनेता मोहनलाल ने भी व्यवसायी की मौत पर शोक जताया।
रॉय द्वारा निर्मित कुछ फिल्मों में अभिनय कर चुके मोहनलाल ने शनिवार को फेसबुक पोस्ट में कहा, “मेरे प्रिय मित्र सी जे रॉय की मौत की खबर अविश्वसनीय और अत्यंत पीड़ादायक है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। वह दोस्त से बढ़कर थे।” पुलिस ने पहले कहा था कि आयकर विभाग की छापेमारी के बीच रॉय ने शुक्रवार दोपहर बेंगलुरु स्थित अपने कार्यालय में कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
रॉय के भाई बाबू ने आरोप लगाया है कि संभवत: केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में उन्होंने यह कदम उठाया। बाबू ने शनिवार को बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान इन आरोपों को दोहराया।