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कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने लिखा पत्र

कोचिंग विलासिता नहीं ज़रूरत है – सीएफआई

नयी दिल्ली : कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई)ने केंद्रीय वित्तमंत्री से बजट में कोचिंग सेवाओं पर जीएसटी में छूट देने का आग्रह किया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन को पत्र लिखकर कोचिंग सेवाओं का जीएसटी घटाकर पांच फीसदी या शून्य करने और छोटे संस्थानों को छूट सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये की मांग रखी है। इसमें अभिभावकों की दिक्कतों का हवाला दिया गया है, जिससे जीएसटी शुल्क घटने या शून्य होने पर कोचिंग की फीस में भी कमी आएगी।

सीएफआई अध्यक्ष सौरभ सक्सेना ने कहा, जीएसटी में छूट कोचिंग केंद्रों को दी जाने वाली रियायत नहीं है। यह सीधे तौर पर अभिभावकों और छात्रों को राहत देगी। वर्तमान में, कोचिंग सेवाओं पर जीएसटी का बोझ मध्यम वर्ग खासकर महत्वाकांक्षी परिवारों के अभिभावकों के लिए शिक्षा की लागत को सीधे तौर पर बढ़ा देता है, जिससे पूरक शिक्षा प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है।

इसलिए लघु व मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की सुरक्षा और अनुपालन में सुधार के लिए कोचिंग सेवाओं पर जीएसटी को घटाना या शून्य करने की मांग है। इसमें लिखा है,कोचिंग अब कोई वैकल्पिक विलासिता नहीं रह गई है। दसवीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा, जेईई, नीट, सीयूईटी, सीए/सीएस, सीएलएटी, एसएससी, बैंकिंग और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग लेनी पड़ती है।

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