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उत्तर एवं मध्य अंडमान जिला परिषद अध्यक्ष ने कंटेनरों में ईंधन आपूर्ति पर रोक को लेकर जताई चिंता

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : उत्तर एवं मध्य अंडमान जिला परिषद के अध्यक्ष अलागर स्वामी ने बाराटांग से डिगलीपुर तक के क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर कैन तथा पोर्टेबल टैंकों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कथित रूप से लगाए गए प्रतिबंध पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस कदम का पर्यटन गतिविधियों, मछुआरों तथा क्षेत्र में संचालित अन्य आवश्यक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सन्मार्ग से बातचीत करते हुए अलागर स्वामी ने बताया कि पर्यटन गतिविधियों से जुड़े कई स्थानीय युवाओं ने उनसे संपर्क कर शिकायत की है कि पिछले दो दिनों से पेट्रोल पंपों पर उन्हें कंटेनरों में ईंधन देने से मना किया जा रहा है। उनके अनुसार इस प्रतिबंध के कारण फाइबर बोट संचालकों के बीच अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई है, क्योंकि वे पर्यटन संबंधी यात्राओं के संचालन के लिए पेट्रोल पंपों से खरीदे गए ईंधन पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ईंधन केवल वाहनों में ही भरा जाएगा तो नाव संचालक, मछुआरे तथा जनरेटर और अन्य उपकरणों के लिए ईंधन की आवश्यकता रखने वाले लोग अपनी जरूरतें कैसे पूरी करेंगे। उन्होंने कहा कि फाइबर बोट और जनरेटर सेटों को वाहनों और ट्रकों की तरह पेट्रोल पंप तक नहीं लाया जा सकता। जिला परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यह कथित प्रतिबंध पर्यटन गतिविधियों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, विशेष रूप से उन नौका सेवाओं पर जो पर्यटकों को गुफाओं और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंचाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईंधन उपलब्धता में किसी भी प्रकार की बाधा से पर्यटकों को असुविधा होगी और पर्यटन क्षेत्र पर निर्भर स्थानीय युवाओं की आजीविका भी प्रभावित होगी। अलागर स्वामी ने यह भी कहा कि आमतौर पर लोग अपने घरों में बड़ी मात्रा में ईंधन का भंडारण नहीं करते हैं, बल्कि आवश्यकता के अनुसार ही ईंधन खरीदते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी पर्यटन स्थल तक जाने वाले एक नाव संचालक को लगभग 20 लीटर ईंधन की आवश्यकता होती है और वह केवल उतनी ही मात्रा खरीदता है जितनी तत्काल उपयोग के लिए आवश्यक हो। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने उत्तरी एवं मध्य अंडमान के उपायुक्त से चर्चा की है और उन्हें उम्मीद है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान निकलेगा। उन्होंने प्रशासन और मुख्य सचिव से मामले की तत्काल समीक्षा कर पूर्व व्यवस्था को बहाल करने का आग्रह किया ताकि पर्यटन गतिविधियां, मत्स्य व्यवसाय और अन्य आवश्यक सेवाएं बिना किसी व्यवधान के संचालित होती रहें। अलागर स्वामी ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय स्थानीय युवाओं और निवासियों के हित में होगा तथा यह भी सुनिश्चित करेगा कि द्वीपों का भ्रमण करने आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।


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