तमलिनाडु के मुख्यमंत्री विजय  
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तमिलनाडु राजनीति: विजय का बड़ा दांव, राज्यसभा सीट कांग्रेस को

डीएमके ने फैसले को ‘अतिरिक्त रियायत’ और भाजपा से सीधी टक्कर से बचने की कोशिश बताया, जबकि कांग्रेस इसे दक्षिण में विपक्षी एकजुटता और 2029 की तैयारी के रूप में देख रही है

Tamil Nadu की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री और Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) प्रमुख C. Joseph Vijay ने राज्य की एकमात्र खाली राज्यसभा सीट अपनी सहयोगी पार्टी Indian National Congress को देने का ऐलान किया है। इस फैसले को जहां कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा माना जा रहा है, वहीं Dravida Munnetra Kazhagam (डीएमके) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

पहले ही एक राज्यसभा और 28 विस सीटें दी जा चुकी हैं

डीएमके ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले ही गठबंधन में एक राज्यसभा सीट और 28 विधानसभा सीटें दी जा चुकी हैं, ऐसे में यह फैसला “अतिरिक्त रियायत” जैसा है। पार्टी प्रवक्ता ए. सरवनन ने आरोप लगाया कि टीवीके संसद में भाजपा से सीधे टकराव से बचने के लिए यह जिम्मेदारी कांग्रेस को “आउटसोर्स” कर रही है। हालांकि टीवीके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम गठबंधन को मजबूत करने और साझा राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

सरकार बचाने में कांग्रेस की अहम भूमिका

दरअसल, तमिलनाडु में अल्पमत सरकार चला रही टीवीके के लिए कांग्रेस का समर्थन बेहद अहम है। पार्टी अपने दम पर बहुमत से करीब 10 सीट पीछे है, जबकि कांग्रेस के पांच विधायक सरकार को स्थिर बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में इस फैसले को राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी रणनीतिकार Praveen Chakravarty का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिन्हें कांग्रेस-टीवीके गठबंधन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है।

कांग्रेस ने किया फैसले का स्वागत

गौरतलब है कि यह सीट All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (एआईएडीएमके) नेता सी.वी. षणमुगम के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री विजय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे संसद में पार्टी की आवाज मजबूत होगी और Bharatiya Janata Party के खिलाफ मुकाबले में मजबूती मिलेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल राज्यसभा में कांग्रेस की उपस्थिति बढ़ाएगा, बल्कि 2029 लोकसभा चुनावों से पहले दक्षिण भारत में विपक्षी एकजुटता को भी नया आधार दे सकता है।

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