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दो दिवसीय मैंग्रोव कार्यशाला का सफल समापन

सन्मार्ग संवाददाता

 श्री विजयपुरम : पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय मैंग्रोव कार्यशाला का 22 मार्च को हैडो, श्री विजय पुरम में सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन समारोह में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक श्री संजय कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. बी. नागराजन, वैज्ञानिक-जी एवं समूह समन्वयक (अनुसंधान), वन आनुवंशिकी संस्थान, कोयंबटूर उपस्थित थे। कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रख्यात वैज्ञानिक, वक्ता, शोधार्थी, छात्र, शिक्षक तथा अन्य गणमान्य अतिथि भी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री जोजू पी. अलप्पट्ट , उप वन संरक्षक द्वारा स्वागत भाषण एवं प्रतिवेदन प्रस्तुति के साथ हुआ। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने वन विभाग द्वारा इस कार्यशाला के सफल आयोजन की सराहना की। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों से मैंग्रोव पारितंत्र के बारे में गहन जानकारी प्राप्त करने का आह्वान किया, जो विभिन्न जीवों के जीवन के साथ-साथ स्थानीय आजीविका को भी समर्थन प्रदान करता है। उन्होंने भविष्य में इस प्रकार की कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर भी बल दिया। इससे पूर्व, डॉ. एस. दिनेश कन्नन, मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान एवं कार्य योजना तथा वन्यजीव) ने छात्रों और शोधार्थियों से तटीय एवं समुद्री पारितंत्र में नए शोध के अवसरों को तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने भारत सरकार की पहल ‘राष्ट्रीय तटीय मिशन’ के अंतर्गत शोध समुदाय के लिए उपलब्ध विभिन्न अवसरों पर प्रकाश डाला। मुख्यभूमि और द्वीपों से आए प्रख्यात वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसके पश्चात शोधार्थियों द्वारा वैज्ञानिक शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यशाला में पांच प्रमुख विषयों-तटीय संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन में मैंग्रोव की भूमिका, मैंग्रोव जैव विविधता एवं संबंधित समुद्री जीवन, मैंग्रोव वनों में इको-टूरिज़्म की संभावनाएं, मैंग्रोव पुनर्स्थापन तकनीक एवं सर्वात्तम प्रथाएं तथा मैंग्रोव से जुड़े सामुदायिक सहभागिता एवं आजीविका अवसर-पर विस्तृत चर्चा की गई। दो दिवसीय इस कार्यशाला में कुल 17 शोध पत्रों एवं प्रस्तुतियों को दृष्टिगोचर किया गया, जिनमें कॉलेजों के प्राध्यापक, शोधार्थी, गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) तथा द्वीपसमूह एवं मुख्यभूमि के शिक्षक शामिल थे। इसके साथ ही अण्डमान तथा निकोबार प्रशासन के विभिन्न विभागों द्वारा भी प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यशाला में कुल 75 प्रतिभागियों, जिनमें मुख्य रूप से छात्र, शिक्षक एवं शोधार्थी शामिल थे, ने भाग लिया। समापन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र एवं श्रेष्ठ शोध पत्र प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कार वितरित किए गए।

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