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विकास कार्य शुरू नहीं हुए तो मुख्य सचिव कार्यालय पर धरना : परनशाला ग्राम पंचायत प्रधान

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : परनशाला ग्राम पंचायत के प्रधान बालामुरुगन ने पंचायत क्षेत्र में स्वीकृत विकास कार्यों के क्रियान्वयन में हो रही लगातार प्रशासनिक देरी तथा लंबे समय से लंबित जनसमस्याओं पर नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी पंचायत के स्वीकृत विकास कार्यों को शीघ्र शुरू नहीं किया गया तो वह मुख्य सचिव कार्यालय के निकट शांतिपूर्ण धरने पर बैठेंगे।सन्मार्ग संवाददाता से बातचीत करते हुए प्रधान ने कहा कि उन्होंने राजनीति या पद प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने और अपनी पंचायत का विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के अब केवल कुछ ही महीने शेष बचे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बावजूद कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं आज तक शुरू नहीं हो सकी हैं।उन्होंने कहा, "यदि ये लंबित कार्य जल्द शुरू नहीं किए गए तो मैं मुख्य सचिव कार्यालय के निकट शांतिपूर्ण धरने पर बैठूंगा। यदि मुझे वहां अकेले भी बैठना पड़े तो भी मैं अपनी पंचायत के लोगों के हित और विकास के लिए ऐसा करूंगा।"प्रधान ने आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र के कई निर्माण कार्यों को पहले ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं तथा ठेकेदारों का चयन भी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद कार्य प्रारंभ नहीं किए गए हैं। उनके अनुसार लंबित परियोजनाओं में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण तथा रामपुर के वार्ड संख्या-4 स्थित ईसाई कब्रिस्तान तक सीसी फुटपाथ का निर्माण शामिल है।उन्होंने दावा किया कि इन परियोजनाओं को शुरू कराने के लिए उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी ये योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित हैं। उनके अनुसार ठेकेदारों ने उन्हें बताया है कि संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति या स्वीकृति नहीं मिलने के कारण वे कार्य प्रारंभ नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए प्रधान ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर हो रही देरी के कारण निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि जनता से किए गए अपने वादों को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्वीकृत विकास परियोजनाएं भी निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यकाल के दौरान पूरी नहीं हो पातीं, तो इससे पंचायती राज व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित होता है।लंबित निर्माण कार्यों के अलावा प्रधान ने क्षेत्र में कृषि अवसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत के बड़ी संख्या में किसान सब्जी एवं धान की खेती पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं, लेकिन पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के अभाव में उन्हें लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 से ही वह क्षेत्र में एक बड़े बांध के निर्माण की मांग कर रहे हैं तथा इस संबंध में अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के विभिन्न विभागों को विस्तृत प्रस्ताव भी सौंप चुके हैं। उनके अनुसार प्रस्तावित बांध के साथ-साथ चेक डैम और रिटेनिंग वॉल का निर्माण किए जाने से क्षेत्र की नदियों और प्राकृतिक जलधाराओं को जोड़कर वर्षा जल का बेहतर संरक्षण किया जा सकेगा।प्रधान ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी तथा गर्मी और शुष्क मौसम के दौरान पानी की कमी की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ने से स्थानीय बाजारों में सब्जियों की कीमतों में भी कमी आएगी, जिसका लाभ किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।उन्होंने प्रशासन से पंचायत को कृषि कार्यों के लिए एक ट्रैक्टर उपलब्ध कराने की भी मांग की। उनका कहना था कि आधुनिक कृषि उपकरणों और यंत्रीकृत खेती की सुविधा मिलने से खेती की उत्पादकता बढ़ेगी तथा किसानों का श्रम और लागत दोनों कम होंगे। प्रधान ने कहा कि पिछले कई वर्षों के दौरान उन्होंने इन सभी मुद्दों को लेकर प्रशासन के समक्ष अनेक ज्ञापन और आवेदन प्रस्तुत किए हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका प्रस्तावित धरना किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि अपनी पंचायत के लोगों के विकास और उनके हितों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।




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