ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट के सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) को लेकर जारी विरोध के बीच मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रभावित समुदायों के साथ संवाद की पहल की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 5 अक्टूबर को सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (SIFF) के साथ बातचीत का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, SIFF ने आंतरिक विचार-विमर्श के लिए बैठक को 11 अक्टूबर के बाद आयोजित करने का आग्रह किया है। सियांग परियोजना को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से स्थानीय स्तर पर आपत्तियां सामने आती रही हैं। प्रस्तावित परियोजना के प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) के लिए किए जा रहे सर्वे और अन्य गतिविधियों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया है। स्थानीय समूहों की ओर से सर्वे प्रक्रिया रोकने और प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को हटाने की मांग की गई है।
खांडू ने स्पष्ट किया सर्वे का उद्देश्य
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने परियोजना को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल किया जा रहा PFR सर्वे परियोजना को अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया नहीं है। इसका उद्देश्य केवल प्रस्तावित परियोजना की तकनीकी और व्यवहार्यता संबंधी संभावनाओं का आकलन करना है। खांडू के अनुसार, विशेषज्ञों के अध्ययन के बाद यदि परियोजना व्यवहार्य नहीं पाई जाती है तो इसे आगे बढ़ाने का सवाल ही नहीं उठेगा। इस तरह सरकार ने सर्वे और परियोजना के अंतिम क्रियान्वयन के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की है।
स्थानीय संगठनों से सीधे संवाद पर जोर
सरकार की बातचीत की पहल का उद्देश्य परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों की आशंकाओं और सवालों को समझना तथा सरकार की ओर से उपलब्ध जानकारी उनके सामने रखना है। SIFF ने तत्काल बैठक के बजाय 11 अक्टूबर के बाद चर्चा का आग्रह किया है, ताकि संगठन अपने स्तर पर विचार-विमर्श कर सके। सियांग परियोजना का मुद्दा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके साथ स्थानीय समुदायों की भूमि, पर्यावरण, संभावित विस्थापन, आजीविका और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े सवाल भी जुड़े हैं। ऐसे में सरकार और प्रभावित समुदायों के बीच सीधा संवाद परियोजना से संबंधित विभिन्न पक्षों को सामने रखने का माध्यम बन सकता है।
विकास और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ रही सरकार
राज्य सरकार सियांग परियोजना को अरुणाचल प्रदेश की विकास आवश्यकताओं और ऊर्जा क्षमता से जोड़कर देख रही है। सरकार के अनुसार, परियोजना आगे बढ़ने की स्थिति में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही राज्य और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी इसकी भूमिका हो सकती है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यही वजह है कि परियोजना की व्यवहार्यता, संभावित प्रभाव और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी की मांग महत्वपूर्ण बनी हुई है।
PFR के बाद ही आगे की तस्वीर
वर्तमान चरण में परियोजना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया PFR सर्वे है। इसके जरिये परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता और अन्य जरूरी पहलुओं का आकलन किया जाना है। मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक, इस अध्ययन के परिणाम आगे की प्रक्रिया तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में सरकार और SIFF के बीच प्रस्तावित बातचीत को सियांग परियोजना से जुड़े मतभेदों और आशंकाओं पर संवाद का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। बैठक की तारीख और स्वरूप पर अंतिम सहमति 11 अक्टूबर के बाद होने वाली चर्चाओं के आधार पर तय होने की संभावना है।