सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : कैंपबेल बे में शुक्रवार को आयोजित वन विभाग श्रमिक भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक गंभीर स्थिति सामने आई, जब भीषण गर्मी और लू जैसे हालात के बीच आयोजित शारीरिक दौड़ परीक्षा में कई महिला अभ्यर्थियां अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। घटना के बाद लगभग पांच युवतियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिससे भर्ती प्रक्रिया की व्यवस्था और समय निर्धारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों और स्थानीय निवासियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रतिभागियों को सुबह लगभग 5 बजे रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, दौड़ परीक्षा कथित रूप से सुबह लगभग 6:45 बजे शुरू हुई। अभ्यर्थियों को लगभग 50-50 प्रतिभागियों के समूह में बांटा गया था तथा तीन अलग-अलग बैचों में दौड़ आयोजित की गई। बताया गया है कि दौड़ का मार्ग कैंपबेल बे के मिनी स्टेडियम से शुरू होकर लगभग छह किलोमीटर दूर गोविंद नगर क्षेत्र तक निर्धारित किया गया था, जिसके बाद प्रतिभागियों को पुनः मिनी स्टेडियम लौटना था। इस प्रकार कुल दौड़ की दूरी लगभग 12 किलोमीटर रही। भर्ती प्रक्रिया में देरी होने के कारण तीसरे बैच की महिला अभ्यर्थियों की दौड़ कथित रूप से सुबह लगभग 11 बजे शुरू हुई, जब देश के कई हिस्सों की तरह कैंपबेल बे में भीषण गर्मी और तेज धूप का असर काफी बढ़ चुका था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज धूप और गर्मी के कारण कई युवतियों को दौड़ पूरी करने में भारी कठिनाई हुई तथा कई अभ्यर्थियां दौड़ के दौरान या उसके तुरंत बाद बेहोश होकर गिर पड़ीं।
बीमार हुई अभ्यर्थियों को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट के अनुसार लगभग पांच युवतियों को थकावट, डिहाइड्रेशन और गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों में चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान इतनी कठिन 12 किलोमीटर की दौड़ आयोजित कर अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया गया। कई स्थानीय लोगों ने बताया कि इस प्रकार की शारीरिक भर्ती परीक्षाएं सामान्यतः सुबह जल्दी या शाम के समय आयोजित की जाती हैं ताकि खतरनाक मौसम परिस्थितियों से बचा जा सके।
ग्राम पंचायत कैंपबेल बे की प्रधान रामेश्वरी ने प्रशासन से इस मामले को मानवीय आधार पर देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान बीमार होकर अस्पताल पहुंचीं युवतियों को दौड़ परीक्षा में पुनः शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, कई अभ्यर्थी वर्षों से इस भर्ती अवसर की तैयारी कर रहे थे और उन्हें सुरक्षित तथा उचित परिस्थितियों में प्रतिस्पर्धा का निष्पक्ष मौका मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि अंतिम चरण की दौड़ दोपहर की अत्यधिक गर्मी में आयोजित हुई, इसलिए प्रभावित अभ्यर्थियों को उन परिस्थितियों के कारण अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए जो उनके नियंत्रण से बाहर थीं।
अब स्थानीय निवासी वन विभाग के अधिकारियों से पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करने तथा भर्ती दौड़ के दौरान स्वास्थ्य आपात स्थिति का सामना करने वाली अभ्यर्थियों को पुनः परीक्षा का अवसर प्रदान करने की मांग कर रहे हैं।