सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार पुलिस ने 1 जनवरी से 20 अगस्त 2026 की अवधि के लिए निर्धारित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश प्रदर्शन मैट्रिक्स के तहत आंके गए सभी मानकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है। इस प्रदर्शन की समीक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित 52वीं प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान की गई।
साइबर अपराध प्रदर्शन मैट्रिक्स के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रदर्शन का आकलन साइबर अपराध की रोकथाम एवं प्रतिक्रिया, जांच, पीड़ितों की सहायता, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय तथा क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में किया जाता है।
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह ने मूल्यांकन किए गए सभी मानकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज किया है। यह द्वीपों में साइबर अपराध से निपटने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अंडमान एवं निकोबार पुलिस द्वारा किए जा रहे निरंतर और केंद्रित प्रयासों को दर्शाता है। इस मूल्यांकन में राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र, ई-जीरो एफआईआर, शिकायत निवारण मॉड्यूल, मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल, सहयोग और समन्वय प्लेटफॉर्म, साइबर अपराध हॉटस्पॉट कार्रवाई, साइट्रेन तथा आईईसी गतिविधियों जैसी महत्वपूर्ण पहलों को शामिल किया गया।
इन प्रयासों के तहत अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह साइबर अपराध समन्वय केंद्र की स्थापना कर उसे संचालित किया गया है। वहीं, केंद्रशासित प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था भी सफलतापूर्वक लागू की गई है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने के लिए अंडमान एवं निकोबार पुलिस ने मामला दर्ज करने में पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की सीमा 1 लाख रुपये से घटाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। इससे 50 हजार रुपये या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का सामना करने वाले पीड़ितों की एफआईआर दर्ज की जा सकेगी और उन्हें समय पर कानूनी एवं जांच संबंधी सहायता मिल सकेगी। इन उपायों से साइबर अपराध संबंधी शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने तथा संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय करने की पुलिस की क्षमता मजबूत हुई है।
अंडमान एवं निकोबार पुलिस ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुलिस प्रशिक्षण संस्थान में समर्पित साइबर फोरेंसिक प्रशिक्षण प्रयोगशाला की स्थापना कर अपनी तकनीकी और फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत किया है। यह सुविधा नए भर्ती पुलिसकर्मियों तथा कार्यरत पुलिस अधिकारियों को डिजिटल फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करती है। आधुनिक फोरेंसिक उपकरणों से सुसज्जित यह प्रयोगशाला जांच अधिकारियों के डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण, परीक्षण और विश्लेषण संबंधी तकनीकी कौशल को बढ़ाएगी, जिससे साइबर अपराध के मामलों की अधिक प्रभावी और पेशेवर जांच में योगदान मिलेगा।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के क्षेत्र में अंडमान एवं निकोबार पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई और समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप इस अवधि के दौरान पीड़ितों को 1,72,51,012 रुपये की राशि वापस दिलाने या बहाल करने में सफलता मिली। यह त्वरित प्रतिक्रिया, पीड़ित सहायता और साइबर धोखाधड़ी से होने वाले वित्तीय नुकसान से नागरिकों की सुरक्षा को दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है।
राष्ट्रीय स्तर की प्रगति समीक्षा में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को मिली यह पहचान द्वीपवासियों के लिए गर्व का विषय है। यह तकनीक आधारित पुलिसिंग, प्रभावी साइबर अपराध जांच एवं प्रतिक्रिया, क्षमता निर्माण तथा नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अंडमान एवं निकोबार पुलिस के कर्मियों के सामूहिक प्रयास और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह उपलब्धि साइबर अपराध से मुकाबला करने में जनजागरूकता और समय पर शिकायत दर्ज कराने के महत्व को भी रेखांकित करती है।
नागरिकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की अपील की गई है। किसी भी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर अपराध थाना हेल्पलाइन नंबर 03192-230668 एवं 9531856083 पर सूचना देने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।