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विदेशी यूनिवर्सिटी कैंपस से छात्रों को राहत, ट्यूशन फीस में 50% तक कटौती संभव

शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को ट्यूशन फीस में करीब 50 प्रतिशत तक राहत मिल सकती है।

अंजलि भाटिया

नई दिल्ली : भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खुलने से उच्च शिक्षा की फीस में बड़ी कमी आ सकती है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को ट्यूशन फीस में करीब 50 प्रतिशत तक राहत मिल सकती है।

अभी भारतीय छात्रों को विदेश जाकर पढ़ाई करने पर भारी खर्च उठाना पड़ता है, क्योंकि वहां ट्यूशन फीस के साथ रहने और अन्य खर्च भी काफी अधिक होते हैं। लेकिन यदि वही विश्वविद्यालय भारत में अपना कैंपस खोलते हैं तो छात्रों को अपेक्षाकृत कम फीस पर वही पाठ्यक्रम पढ़ने का अवसर मिलेगा। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि कुछ मामलों में फीस का अंतर 50 प्रतिशत से भी अधिक हो सकता है।

नीति के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस के लिए स्थानीय शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी। साथ ही यदि किसी शिक्षक को मुख्य कैंपस से भारत बुलाया जाता है तो उसे कम से कम छह महीने, यानी एक सेमेस्टर तक पढ़ाना अनिवार्य होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ छात्रों का कुल शैक्षणिक खर्च भी कम होगा। भारत स्थित कैंपस के लिए अलग फीस ढांचा तय किया जाएगा, जिससे शुल्क अधिक व्यावहारिक और संतुलित रहेगा।

इसके अलावा, भारतीय छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों के मुख्य कैंपस में एक सेमेस्टर पढ़ने का अवसर भी मिल सकता है। भारत और विदेश के संस्थानों के बीच इस तरह के शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए समझौते किए जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के छात्र एक-दूसरे के कैंपस में अध्ययन कर सकेंगे।

2026 में जारी होने वाली नई ‘इंडिया रैंकिंग’ में भी कई बदलाव प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के मुताबिक, रैंकिंग प्रक्रिया में शोध कार्य को अधिक महत्व दिया जाएगा। साथ ही, रिसर्च पब्लिकेशन में गलत या भ्रामक जानकारी देने वाले संस्थानों के लिए नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान होगा। नई रैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त पैरामीटर और नई कैटेगरी भी जोड़ी जाएंगी।

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