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अहोम राजवंश की राजधानी रंगपुर-शिवसागर को यूनेस्को विरासत सूची में शामिल कराने का आवेदन

मिलेगी वैश्विक पहचान

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि छह शताब्दियों तक ब्रह्मपुत्र घाटी के बड़े हिस्से पर शासन करने वाले अहोम राजवंश की राजधानी रहे रंगपुर-शिवसागर ऐतिहासिक संकुल को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए भारत ने औपचारिक रूप से नामांकन किया है। यूनेस्को के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत की ओर से यह नामांकन 19 जून 2026 को ‘रंगपुर-शिवसागर हिस्टोरिक एन्सेंबल’ के नाम से प्रस्तुत किया गया और इसे सांस्कृतिक श्रेणी में मानदंड (iii) और (iv) के तहत रखा गया है। मुख्यमंत्री शर्मा ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि यह कदम असम की अहोम विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। रंगपुर-शिवसागर संकुल उस ऐतिहासिक राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को संरक्षित करता है, जो अहोम शासन के दौरान विकसित हुआ था।

रंगपुर और शिवसागर—अहोम सत्ता के महत्वपूर्ण केंद्र

यूनेस्को के नामांकन दस्तावेज के मुताबिक, यह ऐतिहासिक संकुल वर्तमान शिवसागर जिले में स्थित है और इसके दो प्रमुख हिस्से रंगपुर और शिवसागर हैं। रंगपुर का विकास अहोम राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह के शासनकाल में एक नियोजित राजधानी के रूप में हुआ। इस क्षेत्र में महल, किलेबंद संरचनाएं, मंदिर, विशाल जलाशय, समारोह एवं मनोरंजन से जुड़े भवन और ऐतिहासिक सड़क मार्ग शामिल हैं। असम सरकार के अनुसार, वर्तमान शिवसागर को पहले रंगपुर के नाम से जाना जाता था और यह 1699 से 1788 तक अहोम साम्राज्य की राजधानी रहा। जिले में अहोम काल के 350 से अधिक प्राचीन स्मारक मौजूद हैं।  

रंग घर और तालातल घर प्रमुख आकर्षण

प्रस्तावित विरासत संकुल में अहोम स्थापत्य के कई महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। इनमें रंग घर, तालातल घर, करंग घर, शिवसागर के मंदिर और विशाल जलाशय प्रमुख हैं।  असम सरकार के मुताबिक, रंग घर का निर्माण 18वीं शताब्दी में अहोम शासक स्वर्गदेव प्रमत्त सिंह के शासनकाल में हुआ था। यह दो मंजिला राजकीय मंडप था, जहां राजपरिवार और आम लोग खेल एवं मनोरंजन कार्यक्रम देखते थे। तालातल घर भी अहोम स्थापत्य और सैन्य-इंजीनियरिंग क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। पूरे शिवसागर क्षेत्र में महलों और मंदिरों के साथ बड़े जलाशयों तथा जल प्रबंधन प्रणालियों का ऐसा नेटवर्क विकसित किया गया था, जो उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है। 

यूनेस्को के दो मानदंडों पर नामांकन

भारत ने रंगपुर-शिवसागर संकुल को यूनेस्को के मानदंड (iii) और (iv) के तहत नामांकित किया है। मानदंड (iii) किसी जीवित या विलुप्त सांस्कृतिक परंपरा अथवा सभ्यता की विशिष्ट या असाधारण गवाही से जुड़ा है। वहीं मानदंड (iv) किसी भवन, स्थापत्य या तकनीकी संकुल अथवा ऐतिहासिक परिदृश्य के ऐसे उत्कृष्ट उदाहरण से संबंधित है, जो मानव इतिहास के किसी महत्वपूर्ण चरण को दर्शाता हो। नामांकन दस्तावेज में कहा गया है कि रंगपुर-शिवसागर संकुल अहोम शासन की सांस्कृतिक परंपराओं, राज्य व्यवस्था, स्थापत्य, जल प्रबंधन और शहरी नियोजन का असाधारण उदाहरण प्रस्तुत करता है। विशाल जलाशयों, मंदिरों, महलों, रंग घर और अन्य संरचनाओं को एक व्यापक ऐतिहासिक परिदृश्य का हिस्सा बताया गया है। 

चराइदेव मोइदम के बाद दूसरा बड़ा प्रयास

यह पहल चराइदेव मोइदम को 2024 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद अहोम विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है। यूनेस्को ने चराइदेव के मोइदम को भी मानदंड (iii) और (iv) के आधार पर विश्व धरोहर सूची में शामिल किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि चराइदेव वह स्थान है जहां अहोम राजवंश के शासकों की समाधियां हैं, जबकि रंगपुर-शिवसागर वह ऐतिहासिक परिदृश्य है जहां से इस राजवंश ने शासन किया। उनके अनुसार, दोनों स्थल मिलकर अहोम इतिहास के अलग-अलग महत्वपूर्ण पक्षों को सामने लाते हैं।

मोदी को धन्यवाद दिया

मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया और कहा कि असम की ऐतिहासिक विरासत को वह वैश्विक पहचान दिलाने के लिए केंद्र की ओर से महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं, जिसकी वह हकदार है। हालांकि, नामांकन हो जाना यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हो जाना नहीं है। रंगपुर-शिवसागर फिलहाल यूनेस्को की *Tentative List* में है। आगे नामांकन का मूल्यांकन और विश्व धरोहर समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर अंतिम निर्णय होगा। यूनेस्को के अनुसार, अंतिम निर्णय विश्व धरोहर समिति करती है और किसी स्थल को उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य साबित करना होता है।

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