प्रख्यात कथावाचक और संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अलीगढ़ में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान देश की सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों पर खुलकर अपनी बात रखी। 
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अलीगढ़ में रामभद्राचार्य का बड़ा बयान: ‘लव और लैंड जिहाद से सतर्क रहने की जरूरत’

राम मंदिर को आस्था और संघर्ष का प्रतीक बताते हुए कृष्ण जन्मभूमि विवाद के समाधान तक किसी कृष्ण मंदिर में दर्शन न करने का संकल्प, अलीगढ़ का नाम ‘हरिगढ़’ करने की भी मांग

Goutam Ojha

अलीगढ़ः प्रख्यात कथावाचक और संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अलीगढ़ में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान देश की सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश दो गंभीर चुनौतियों-‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’-का सामना कर रहा है, इसलिए समाज और विशेष रूप से बेटियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

अकराबाद क्षेत्र के लधौआ चीनी मिल परिसर में आयोजित कथा कार्यक्रम में रामभद्राचार्य ने कहा कि कई मामलों में युवतियों को प्रेम संबंधों के नाम पर धोखे का शिकार बनाया जाता है, जिसके परिणाम बेहद दुखद होते हैं। उन्होंने परिवारों से अपनी बेटियों को जागरूक और सुरक्षित रखने का आह्वान किया।

राम मंदिर को बताया आस्था और संघर्ष का प्रतीक

अपने संबोधन में उन्होंने अयोध्या में निर्मित राम मंदिर को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और लंबे संघर्ष का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने न्यायालय में गवाही दी थी और यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। उनके अनुसार आज अयोध्या का भव्य मंदिर सनातन संस्कृति की गौरवपूर्ण पहचान बन चुका है।

कृष्ण जन्मभूमि, काशी और संभल का भी किया उल्लेख

रामभद्राचार्य ने कहा कि अयोध्या के बाद अब हिंदू समाज की अपेक्षाएं मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि, काशी और संभल से जुड़े मुद्दों को लेकर भी हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत संकल्प है कि कृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विवाद का समाधान होने तक वे किसी कृष्ण मंदिर में दर्शन नहीं करेंगे।

अलीगढ़ का नाम ‘हरिगढ़’ करने की उठाई मांग

कथा के दौरान उन्होंने अलीगढ़ के नाम को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शहर का नाम बदलकर ‘हरिगढ़’ किया जाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहचान रखता है।

राम के आदर्शों को अपनाने का दिया संदेश

रामभद्राचार्य ने अपने प्रवचन में भगवान राम के आदर्शों, मर्यादा, नैतिक मूल्यों और परिवार व्यवस्था की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में संस्कार, नैतिकता और पारिवारिक एकता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है तथा भगवान राम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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