सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के दौरे के बाद ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि द्वीपों में बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय क्षति और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले अंडमान एवं निकोबार से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें कई शिकायतों से अवगत कराया था, जिसके बाद वे यहां आए और ग्रेट निकोबार का दौरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें वहां जाने से रोकने की पूरी कोशिश की, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि ग्रेट निकोबार में लगभग 160 किलोमीटर क्षेत्र में फैले घने वर्षावनों को काटा जा रहा है, जो दुनिया के सबसे समृद्ध पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। उन्होंने दावा किया कि लाखों करोड़ रुपये मूल्य के पेड़ों की कटाई हो रही है और अंडमान-निकोबार के लोगों की जमीन उनसे छीनकर बड़े उद्योगपतियों को दी जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति के फैसले लिए जा रहे हैं और फॉरेस्ट राइट्स एक्ट का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि बसने वाले समुदायों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है, जबकि आदिवासी समुदायों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया तक शुरू नहीं हुई है। राहुल गांधी ने इसे देश की विरासत के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी और देश के लोगों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगी। द्वीपों की अन्य समस्याओं पर बोलते हुए उन्होंने जल संकट को एक प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने उपराज्यपाल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता की कमी है और जनता की सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक देश है और यहां तानाशाही नहीं चल सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य द्वीपों में हो रहे पर्यावरणीय नुकसान और लोगों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाना है। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार सहित अन्य द्वीपों में जो स्थिति है, उसे लेकर वे लगातार आवाज उठाते रहेंगे।