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राधानगर पंचायत ने समस्याओं के समाधान को दिया अल्टीमेटम

15 अगस्त तक समाधान नहीं तो फिर शुरू होगा आंदोलन

Munmun Thakur

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : जर्जर हो चुके बुनियादी ढांचे, लगातार बिगड़ती मूलभूत सुविधाओं और प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ती नाराजगी ने दिगलीपुर की ग्राम पंचायत राधानगर के निवासियों को आंदोलन की कगार पर पहुंचा दिया है।

29 जुलाई 2026 को आयोजित प्रदर्शन के बाद अब स्थानीय पंचायत और आम जनता ने स्थानीय प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ग्राम पंचायत राधानगर की प्रधान नीलिमा सामद्दार ने स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रामीण 15 अगस्त 2026 तक प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई का इंतजार करेंगे। यदि स्वतंत्रता दिवस तक प्रशासन इन गंभीर समस्याओं का समाधान करने में विफल रहता है, तो ग्राम पंचायत 15 अगस्त 2026 के बाद संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक और प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करेगी। इसके बाद भी यदि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो पंचायत एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। इस संभावित आंदोलन की पृष्ठभूमि में 29 जुलाई 2026 को पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों और आम जनता द्वारा राधानगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने आयोजित बड़े पैमाने का धरना है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार प्रशासन, जिसमें उपराज्यपाल और मुख्य सचिव भी शामिल हैं, का ध्यान द्वीपवासियों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही कई गंभीर नागरिक समस्याओं की ओर तत्काल आकर्षित करना था। ग्राम पंचायत राधानगर की प्रधान के अनुसार इन शिकायतों में सबसे प्रमुख क्षेत्र की खराब सड़क व्यवस्था है। डिगलीपुर बाजार को राधानगर से जोड़ने वाली एसएच-15 सड़क वर्तमान में अत्यंत जर्जर और दयनीय स्थिति में है, जिससे रोजाना आवागमन करने वाले लोगों के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा हो रहा है और वाहनों की आवाजाही बेहद कठिन हो गई है। इससे भी अधिक गंभीर स्थिति ललित कटाई के निवासियों की है, जो पांच दशकों से अधिक समय से बुनियादी सड़क संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वर्ष 1969 में ललित कटाई क्षेत्र में परिवारों के बसने के बाद से अब तक यहां कोई उचित मोटर योग्य सड़क नहीं बनाई गई है। ग्रामीणों को कठिन भूभाग पर पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे कृषि उत्पादों के परिवहन, स्कूली बच्चों की आवाजाही और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रधान के अनुसार बुनियादी ढांचे की कमी इतनी गंभीर हो गई है कि बेहतर जीवन स्थितियों की तलाश में कई परिवारों को क्षेत्र से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा, ‘बहुदुर टेकरी’ सड़क की मरम्मत का कार्य, जिसका टेंडर लगभग दो वर्ष पहले जारी कर ठेका भी दिया जा चुका है, अब तक शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आंतरिक संपर्क व्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित है। श्यामनगर-I में जोसेफ टेटे के घर तक जाने वाली मुख्य सड़क, जिसका निर्माण वर्ष 2009 और 2010 के बीच किया गया था, अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसके अलावा, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत बनाए गए दो महत्वपूर्ण पैदल पुल भी बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। पीएचसी राधानगर के पीछे स्थित वह पैदल पुल, जो बर्मा चाड और नया कटाई को जोड़ता है, एक पेड़ के गिरने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और अब सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं है। राधानगर-II में अजित मंडल के आवास के पास स्थित एक अन्य एमपीएलएडीएस पैदल पुल को भी तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। वर्तमान में यह पुल एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रहा है, क्योंकि ललित कटाई की ओर जाने वाला एक अन्य पुल पेड़ गिरने के कारण नष्ट हो चुका है। पंचायत क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। पीएचसी राधानगर में डॉक्टरों, नर्सों और सहायक स्वास्थ्य कर्मचारियों की भारी कमी है तथा जांच और प्रयोगशाला सुविधाओं का भी स्पष्ट अभाव है। सामान्य चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता वाले मरीजों को अक्सर लगभग 22 किलोमीटर दूर दिगलीपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तक जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और आपातकालीन मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


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