लैम्पेडूसा (सिसिली): पोप लियो XIV ने इटली के सिसिली द्वीप स्थित लैम्पेडूसा का दौरा कर उन हजारों प्रवासियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने बेहतर जीवन, आज़ादी और समृद्धि की तलाश में यूरोप पहुंचने की कोशिश के दौरान भूमध्य सागर में अपनी जान गंवा दी।जहां अमेरिका अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ रैलियों, समारोहों और आतिशबाजी के साथ मना रहा था, वहीं इतिहास के पहले अमेरिकी मूल के पोप ने लैम्पेडूसा के प्रवासी कब्रिस्तान में प्रार्थना की और द्वीप के निवासियों तथा हाल ही में पहुंचे प्रवासियों के लिए विशेष प्रार्थना सभा (मास) आयोजित की।
करीब 9 किलोमीटर लंबा लैम्पेडूसा द्वीप अफ्रीका के तट के अधिक निकट है। यह लीबिया और ट्यूनीशिया से नावों के जरिए यूरोप आने वाले लाखों प्रवासियों का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। इनमें से अधिकांश लोग मानव तस्करों की मदद से बेहद जोखिम भरी समुद्री यात्रा करते हैं।
दौरे के दौरान पोप लियो XIV ने बंदरगाह पर कुछ प्रवासियों से मुलाकात की। इसके बाद वे अकेले समुद्र किनारे चट्टानों तक पहुंचे, जहां तेज हवाओं के बीच उन्होंने समुद्र की ओर देखते हुए मौन प्रार्थना की। उन्होंने उस स्मारक पट्टिका का भी अनावरण किया, जिसे पोप फ्रांसिस की 2013 की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में समर्पित किया गया है।
प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए पोप लियो XIV ने कहा,
"यह ऐसी जगह है जहां शब्दों से अधिक इंसानियत के भाव बोलते हैं। लेकिन हर मानवीय कार्य के पीछे संवेदनशील हृदय होना जरूरी है।"
इस विशेष दिन लैम्पेडूसा पहुंचकर पोप ने अमेरिका और यूरोप दोनों को स्पष्ट संदेश दिया कि हर इंसान की गरिमा की रक्षा करना ईसाई मूल्यों और मानवीय जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने विशेष रूप से प्रवासियों और कमजोर वर्गों के प्रति करुणा और सम्मान दिखाने की अपील की।
अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर जारी अपने संदेश में पोप ने कहा कि अजन्मे बच्चों के साथ-साथ हर मानव जीवन की रक्षा का अर्थ यह भी है कि प्रवासियों का स्वागत किया जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाए।
उन्होंने कहा,
"प्रवासियों की उम्मीदें, उनके संघर्ष और उनका योगदान अमेरिका के इतिहास का शुरुआत से ही अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उनका करुणा और उदारता के साथ स्वागत करना केवल दान का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करना है।"
पिछले कुछ वर्षों में लैम्पेडूसा यूरोप के प्रवासन संकट का प्रमुख केंद्र बन गया है। यूरोपीय देश एक ओर अपनी सीमाओं की सुरक्षा करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, जलवायु परिवर्तन और गरीबी से भागकर आने वाले शरणार्थियों के प्रति अपनी मानवीय और कानूनी जिम्मेदारियों को भी निभाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
हालांकि, इस वर्ष इटली पहुंचने वाले प्रवासियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। इटली के गृह मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार तक वर्ष 2026 में 14,464 प्रवासी इटली पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 30,598 थी। वर्ष 2024 में इसी समय तक 26,202 प्रवासी पहुंचे थे।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक भूमध्य सागर में 35,000 से अधिक प्रवासी लापता हो चुके हैं या उनकी मौत हो चुकी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई नौकाएं समुद्र में डूब जाती हैं और उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं बन पाता।