इंफाल : मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने रविवार को कहा कि राज्य में जब तक बंदूक संस्कृति कायम रहेगी, तब तक स्थायी शांति और विकास संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से हिंसा छोड़ने और अवैध हथियार सुरक्षा बलों को सौंपने की अपील की।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कांगपोकपी जिले में अभियान निलंबन (एसओओ) समझौते के तहत उग्रवादी संगठनों के लिए निर्धारित सीनाई शिविर का दौरा किया। किसी मौजूदा मुख्यमंत्री का एसओओ के तहत निर्धारित शिविर का यह पहला दौरा बताया गया है।
सीआरपीएफ ने संभाला शिविर का नियंत्रण
हाल ही में इंफाल पूर्वी जिले के नोंगशुम के पास जलावन की लकड़ी इकट्ठा कर रहे तीन लोगों की हत्या के बाद सीआरपीएफ की कोबरा इकाई, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान चलाया था। इसके बाद शिविर का नियंत्रण सीआरपीएफ ने अपने हाथ में ले लिया।
बयान के मुताबिक, अभियान के दौरान शिविर में 17 ऐसे लोग मिले, जो कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिए एसओओ समझौते के तहत आने वाले उग्रवादी संगठनों के सदस्य होने का दावा कर रहे थे। शिविर में लगभग 150 कैडर के रहने की व्यवस्था थी। यह शिविर कुकी नेशनल आर्मी (केएनए) और कुकी लिबरेशन आर्मी (केएलए) के लिए निर्धारित किया गया था।
निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर जोर
दौरे के दौरान सीआरपीएफ और असम राइफल्स के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सुरक्षा अभियान और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की जानकारी दी। सिंह ने शिविर पर नियंत्रण स्थापित करने में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की भूमिका की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने तलाशी अभियानों में निर्दोष नागरिकों को नुकसान से बचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करना है। बाद में उन्होंने स्थानीय नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से भी बातचीत की तथा राज्य में शांति और सद्भाव बहाल करने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की।