महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ से एक बेहद दुखद और बड़ा हादसा सामने आया है। यहां के मोशी इलाके में स्थित एक कचरा डिपो के पास बने वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट की तीन मंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद मलबे में करीब 14 से 15 मजदूरों और कर्मचारियों के दबे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी
इमारत गिरने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग की कई गाड़ियां और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। इलाके की घेराबंदी कर युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।
कई लोग सुरक्षित निकाले गए, प्रशासन मुस्तैद
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, मलबे से कई कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है जिसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मलबे के नीचे फंसे अन्य लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने के लिए कटर और आधुनिक मशीनों की मदद ली जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे घटनास्थल पर भीड़ न लगाएं और रेस्क्यू रूट को खाली रखें ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।
पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। हादसा इतना अप्रत्याशित और तेज था कि वहां ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को भागने या संभलने का एक पल भी मौका नहीं मिल सका। चश्मदीदों के मुताबिक, इमारत के गिरते ही चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और मौके पर मलबे का विशाल ढेर लग गया, जिसमें कई जिंदगियां दफन हो गईं।
शुरुआती दौर में जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार हादसे के वक्त इमारत की पहली मंजिल पर करीब 14 से 15 कर्मचारी काम कर रहे थे, जिनके इस भारी मलबे के नीचे दबे होने की गंभीर आशंका है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने अभी तक मलबे में फंसे लोगों के सटीक आंकड़ों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, राहत और बचाव दल मलबे को हटाकर आधुनिक उपकरणों के जरिए अंदर फंसे लोगों की लोकेशन का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की हरसंभव कोशिश में जुटे हैं।
पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में हुए इस हादसे पर वहां के मेयर रवि लांडगे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आधिकारिक जानकारी साझा की है। मेयर ने बताया, "पूरे शहर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से जलस्तर में काफी बढ़ोतरी हो गई है। इसी जलभराव के कारण जमा हुआ भारी कचरा और मलबा अचानक खिसककर एक कार्यालय (ऑफिस) की इमारत पर आ गिरा, जिसके दबाव से कंक्रीट का स्लैब ढह गया।"
मेयर ने आगे बताया कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय ऑफिस के अंदर करीब 16 कर्मचारी मौजूद थे, जो वहां खाना खा रहे थे। इनमें से दो कर्मचारी तुरंत बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि बाकी लोग अंदर ही फंस गए।
राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी तरह की जनहानि की खबर नहीं है और सभी कर्मचारी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। फंसे हुए लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मौके पर फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ (NDRF) की टीम, स्थानीय पुलिस के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग के अधिकारी मिलकर राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
हादसे की भयवाह स्थिति को देखते हुए सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और एनडीआरएफ के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। सभी टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
मलबे के ढेर के नीचे दबे लोगों तक तेजी से पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। कंक्रीट के भारी स्लैब को हटाने के लिए कटर और स्लैब-कटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि अंदर फंसे सभी कर्मचारियों को बिना किसी नुकसान के जल्द से जल्द और पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।