नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अब तक 25.89 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के तहत 18,786 क्लस्टर विकसित किए गए हैं, जो कुल 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं।
सरकार के अनुसार, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों (एटीएमए) और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के सहयोग से अब तक करीब 7.17 लाख प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं। किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार ने बताया कि 70,002 कृषि सखियों को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे गांव स्तर पर किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य और उचित पोषक तत्वों के इस्तेमाल संबंधी सलाह दे सकें। वहीं, स्कूल सॉइल हेल्थ कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 में 4,430 स्कूलों और 1,29,167 विद्यार्थियों का पंजीकरण किया गया है।
बयान में कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, जियोस्पेशियल मैपिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से मिट्टी का आकलन और किसानों को सलाह देने की व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई है। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन से निपटने और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
सरकार ने टिकाऊ कृषि, प्राकृतिक खेती, मृदा मानचित्रण और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों और योजनाओं पर जोर दिया है। साथ ही, ग्रीन इंडिया मिशन, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना जैसी पहलें मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन भंडारण को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) प्रतिबद्धताओं के तहत वर्ष 2030 तक 2.5 से 3.0 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार करने का लक्ष्य है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार, वर्ष 2005 से 2021 के बीच देश में 2.29 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार किया जा चुका है।