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मिजोरम में नशे के बढ़ते असर पर NHRC की चिंता

Krishna Das Parth

आइजोल : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के विशेष प्रतिवेदक सैयद अहमद बाबा ने मंगलवार को मिजोरम के सैतुअल जिले के दौरे के दौरान नशे की लत से प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी हस्तक्षेप, पुनर्वास और आवश्यक सहायता पर ध्यान देने की जरूरत है।

नशे की समस्या के मानवीय पहलू पर जोर

NHRC के विशेष प्रतिवेदक ने अपने दौरे के दौरान नशे की लत से जूझ रहे लोगों और इससे समुदाय पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर जानकारी ली। उन्होंने इस समस्या को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय इससे प्रभावित लोगों के मानवाधिकार और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। NHRC के अनुसार, विशेष प्रतिवेदकों की जिम्मेदारी मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों की जांच, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग करना है। आयोग के विशेष प्रतिवेदक संबंधित क्षेत्रों का दौरा कर वहां उभर रही मानवाधिकार संबंधी चिंताओं का आकलन करते हैं और आयोग को अपनी रिपोर्ट एवं सुझाव देते हैं।

सैतुअल में नशीले पदार्थों की चुनौती

सैतुअल जिला म्यांमार और अन्य राज्यों से जुड़ी भौगोलिक स्थिति के कारण नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन की चुनौती का सामना कर रहा है। हाल में जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े मामलों को लेकर अधिकारियों ने भी चिंता जताई है। मिजोरम सरकार भी नशे की समस्या से निपटने के लिए कानून, प्रवर्तन और पुनर्वास से जुड़े उपायों पर काम कर रही है। जुलाई 2026 में राज्य सरकार की कोर कमेटी ने नशीले पदार्थों पर नियंत्रण के लिए राज्य-विशिष्ट कानून तैयार करने या मौजूदा कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने के लिए एक आयोग गठित करने का निर्णय लिया था। बैठक में पुनर्वास, जागरूकता अभियान और युवाओं को नशे से दूर रखने के उपायों पर भी चर्चा हुई थी। NHRC विशेष प्रतिवेदक का सैतुअल दौरा ऐसे समय हुआ है जब मिजोरम में नशीले पदार्थों की तस्करी और नशे की लत से निपटने के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

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