अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : देश में हर साल सड़क हादसों में होने वाली भारी जनहानि को देखते हुए केंद्र सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक साथ कई निर्णायक कदम उठाने का संकेत दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय जल्द ही सभी नई कारों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक को अनिवार्य करने की तैयारी में है। इस तकनीक के जरिए वाहन आपस में रियल-टाइम जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका पहले ही कम की जा सकेगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इसके तहत वाहनों में ऑन-बोर्ड यूनिट लगाई जाएगी, जो वायरलेस तरीके से आसपास चल रहे वाहनों से डेटा का आदान-प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग ने V2V कम्युनिकेशन के लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मंत्रालय का मानना है कि यह तकनीक ड्राइवरों को समय रहते चेतावनी दे सकेगी और ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहनों की पहचान कर हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभाएगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इसके तहत वाहनों में ऑन-बोर्ड यूनिट लगाई जाएगी, जो वायरलेस तरीके से आसपास चल रहे वाहनों से डेटा का आदान-प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग ने V2V कम्युनिकेशन के लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मंत्रालय का मानना है कि यह तकनीक ड्राइवरों को समय रहते चेतावनी दे सकेगी और ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहनों की पहचान कर हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभाएगी।
सरकार ने सड़क हादसों में होने वाली मौतों को 2030 तक 50 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य तय किया है। मंत्रालय के अनुसार, 2023 में देश में 5 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें करीब 1.8 लाख लोगों की मौत हुई। गडकरी यह जानकारी 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों और सचिवों के साथ हुई दो दिवसीय बैठक के बाद मीडिया को दे रहे थे। बैठक में सड़क सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ऑटोमोबाइल नियमन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
हादसा पीड़ितों को इलाज के लिए पैसा नहीं देना होगा
इसी क्रम में गडकरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही देशभर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह योजना समय पर इलाज न मिलने के कारण होने वाली मौतों को कम करने के उद्देश्य से लाई जा रही है। इस योजना के तहत किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को प्रति दुर्घटना अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक उपलब्ध होगी और मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुई सभी श्रेणियों की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर लागू होगी।
चंडीगढ़ में मार्च 2024 में शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव का हवाला देते हुए गडकरी ने बताया कि अब तक आए 6,833 इलाज अनुरोधों में से 5,480 पीड़ितों को पात्र पाया गया, जबकि शेष मामलों को पुलिस सत्यापन के बाद खारिज किया गया। मोटर वाहन दुर्घटना कोष के तहत अब तक 73.88 लाख रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
बस हादसों के बाद नियम सख्त
हाल में हुई तीन घातक बस दुर्घटनाओं, जिनमें 145 से अधिक लोगों की जान गई, का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि अब आगे से स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां ही करेंगी और बस निर्माण व संचालन से जुड़ी सुविधाओं की मान्यता केंद्र सरकार देगी। इसके साथ ही मौजूदा बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, आपातकालीन निकास, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर की थकान पहचानने वाले उपकरण लगाना अनिवार्य किया जाएगा।
सड़क मंत्रालय ने सेव लाइफ फाउंडेशन के साथ मिलकर देश के 100 सबसे अधिक सड़क मौतों वाले जिलों की पहचान की है। इन जिलों में विशेष हस्तक्षेप कर उन्हें ‘जीरो फेटेलिटी जिला’ बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।