काठमांडू : नेपाल ने पिछले महीने आई भयावह बाढ़ में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी सड़क को फिर से बनाने के लिए चीन से मदद मांगी है। चीन के साथ व्यापार के लिये अहम माने जाने वाले इस मार्ग को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ से काफी नुकसान पहुंचा था। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में करीब 1,400 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5,000 से अधिक लोग लापता हैं। स्याफ्रुबेसी को रसुवागढ़ी से जोड़ने वाली लगभग 16 किलोमीटर लंबी सड़क का 6.5 अरब नेपाली रुपये की चीनी निधि वाली परियोजना के तहत उन्नयन किया जा रहा था। लेकिन बाढ़ ने इसके बड़े हिस्से को बहा दिया, जिससे सड़क को भारी नुकसान पहुंचा और दोनों देशों के बीच व्यापार का एक अहम संपर्क टूट गया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, रसुवागढ़ी और गल्छी के बीच क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में कुल मिलाकर लगभग 55 अरब नेपाली रुपये (करीब 36.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का खर्च आएगा।
अमेरिका ने नेपाल को 10 लाख डॉलर की अतिरिक्त सहायता दी
विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों की शिनाख्त के प्रयासों के बीच अमेरिका ने नेपाल पुलिस की डीएनए और फोरेंसिक पहचान क्षमता मजबूत करने के लिए अतिरिक्त 10 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता को मंजूरी दी है। काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास ने यह जानकारी दी। दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग के अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और कानून प्रवर्तन मामलों के ब्यूरो के माध्यम से दी जाने वाली यह धनराशि डीएनए विश्लेषण किट खरीदने समेत फोरेंसिक सहायता में मदद करेगी। अमेरिका ने बाढ़ के बाद अब तक 50 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की मानवीय, स्वास्थ्य और फोरेंसिक सहायता प्रदान की है।