काठमांडू : भारत और नेपाल के बीच चाय व्यापार और सीमा मुद्दे पर बीते हफ्तों में तनाव देखा गया है। अब दोनों देशों में तनातनी का नया मुद्दा चीनी बन सकती है। भारत के तीन साल तक निर्यात पर रोक लगाने की रिपोर्ट से नेपाल में चीनी की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि अल नीनो के चलते भारत में चीनी उत्पादन घट सकता है। इससे नेपाल को आगे भी चीनी देना मुश्किल होगा। नेपाल बड़े पैमाने पर भारत से चीनी मंगाता रहा है। ऐसे में चीनी का मुद्दा नेपाल की बालेन शाह सरकार के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है।
भारत ने मई में चीनी निर्यात पर इस साल सितंबर तक रोक की घोषणा की है। यह प्रतिबंध पिछले साल कम उत्पादन और अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण आने वाले साल में उत्पादन कम होने के जोखिम के कारण लगाया गया है। अब एक नई रिपोर्ट कहती है कि भारत के लिए अगले तीन साल तक चीनी निर्यात संभव नहीं हो सकेगा।
रातोपाटी के मुताबिक, बिराटनगर के उद्योगपति सगुन बोहोरा का कहना है कि बेमौसम बारिश और खराब मौसम की स्थिति के कारण गन्ने के उत्पादन में भारी गिरावट के कारण भारत को चीनी का निर्यात रोकना पड़ा है। भारत के इस फैसला का नेपाल पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
सगुन बोहोरा ने कहा, 'इस साल भारत में गन्ने का उत्पादन कम हुआ है। पहले की तुलना में गन्ने का आकार भी छोटा है। कई जगहों पर बेमौसम बारिश के कारण किसानों की फसलें खराब हुई हैं। यह इसका नकारात्मक प्रभाव है। तत्काल तो नहीं लेकिन इसका असर भविष्य में दिखेगा।'
नेपाल उद्योग महासंघ (FNCCI) कोशी प्रांत के चेयरमैन राजेंद्र राउत का मानना है कि चीनी का आयात ही विकल्प है क्योंकि नेपाल का घरेलू प्रोडक्शन इंडस्ट्री की जरूरतें पूरी नहीं करता है। नेपाल की मांग 250,000 टन है, जबकि घरेलू स्तर पर 150,000 टन प्रोडक्शन होता है। बाकी 100,000 टन का आयात होगा।
भारत से चीनी नहीं मिलेगी तो नेपाल के ब्राजील और पाकिस्तान जैसे तीसरे देशों से आयात करने की संभावना है, जहां गन्ने का काफी ज्यादा प्रोडक्शन होता है। हालांकि इंडस्ट्रियलिस्ट का मानना है कि तीसरे देशों से आयात पर ज्यादा कस्टम ड्यूटी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट के कारण चीनी बहुत महंगी हो जाएगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत कम से कम तीन साल तक बेहद कम चीनी निर्यात करेगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि एल नीनो मौसम गन्ने के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इससे एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देश प्रभावित होंगे, जो चीनी आयात करते हैं। इसमें एक अहम नाम नेपाल का भी है।
कोवरिग एनालिटिक्स के फाउंडर और सीनियर शुगर एनालिस्ट क्लॉडियो कोवरिग ने कहा है कि भारत से निर्यात न होने से चीनी के नेट ट्रेड फ्लो में कमी आएगी। हालांकि वह भारत के 3 साल तक चीनी का निर्यात नहीं करने को ठीक नहीं मानते हैं। अल नीनो की चिंताओं को वह मानते हैं लेकिन उनको लगता है चीजें पटरी पर आ जाएंगी।