सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) की नीति पर असंतोष जताते हुए पूछा कि वह नीट-पीजी परीक्षा की उत्तर कुंजी सीमित रूप से जारी करने पर क्यों जोर दे रहा है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने एनबीईएमएस को लिखित जवाब दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र की प्रति अपने पास रखने की अनुमति देने से परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता कैसे प्रभावित हो सकती है
पीठ ने कहा, “एनबीईएमएस लिखित में बताए कि नीट-पीजी परीक्षा के प्रश्नों का खुलासा करने से परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने में किस तरह बाधा आ सकती है।”
शीर्ष अदालत नीट-पीजी परीक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। इनमें पारदर्शिता के लिए उत्तर कुंजी जारी करने की मांग भी शामिल है।
सुनवाई के दौरान एनबीईएमएस के वकील ने कहा कि स्नातकोत्तर परीक्षा के लिए प्रश्नों का बैंक बहुत सीमित है और इसलिए यह एक राष्ट्रीय संपत्ति है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एक वकील ने कहा कि पिछले वर्षों के नीट-पीजी प्रश्नपत्र अमेजन पर आसानी से बिक रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में एनबीईएमएस प्रश्नों का खुलासा करने से क्यों हिचक रहा है।
इस पर न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा, “पारदर्शिता का क्या होगा? आपको अपने कदम के बारे में और अधिक स्पष्ट करना होगा। हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। आपको बताना होगा कि आपकी परीक्षा दूसरी परीक्षाओं से अलग क्यों है।”
एनबीईएमएस के वकील ने कहा कि प्रश्न सीमित हैं और देशभर के विशेषज्ञ प्रश्न बैंक तैयार करने में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्नों का खुलासा होने पर अगले पांच-छह वर्षों में प्रश्न बैंक के सभी सवाल सार्वजनिक हो सकते हैं।
वकील ने कहा, “यह कठिन परीक्षा है। हम नहीं चाहते कि उम्मीदवारों के पास उत्तर कुंजी हो।”