विशेष संवाददाता, नयी दिल्ली : शिक्षा मामलों की संसद की स्थाई समिति ने बुधवार को NEET UG कंप्यूटर आधारित और चरणबद्ध तरीके से आयोजित करवाने का सुझाव दिया है। समिति का मानना है कि एक ही दिन 22 लाख से अधिक उम्मीदवार परीक्षा देने आते हैं तो परीक्षा संचालन से लेकर सुरक्षा पर भी दिक्कत आती है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा के लिए देश में पर्याप्त बुनियादी डिजिटल सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए, जेईई मेन की तर्ज पर कई शिफ्टों में आयोजित करवाई जानी चाहिए। NTA को UPSC द्वारा अपनाई गई परीक्षाओं के समान परीक्षा प्रथाओं को अपनाने की भी सलाह दी है। इसके अलावा, समिति ने फिर से 21 जून को आयोजित NEET UG के सुरक्षित संचालन की भी सराहना की है। वहीं, NTA ने भरोसा दिलाया, परीक्षाओं की शुचिता बनाने पर काम और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी।
शिक्षा, महिला व बाल विकास मामलों की संसद की स्थाई समिति के नए अध्यक्ष मुकुल वासनिक के समक्ष NTA डीजी अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी समेत अन्य अधिकारी पेश हुए। NTA ने 21 जून को नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में प्रयोग सुरक्षा व्यवस्थाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध, व्हाट्सएप चैनलों की निगरानी, बढ़ी हुई निगरानी और लीक और कदाचार को रोकने के उद्देश्य से प्रश्न पत्र के डिज़ाइन में बदलाव शामिल था। NTA ने समिति को भरोसा दिया है कि 21 जून की परीक्षा के दौरान जिस तरह से काम हुआ है, उसी तर्ज पर आगे भी होगा। सभी परीक्षाओं की शुचिता बनी रहेगी। जैसे नीट यूजी को सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया है, वैसे ही सभी परीक्षाओं में काम होगा। नीट यूजी 2027 की परीक्षा कंप्यूटर आधारित करवाने पर काम शुरू हो गया है।
समिति सदस्यों ने बैठक में सुझाव दिया है कि NEET UG से अभी सभी मेडिकल स्नातक पाठयक्रमों में दाखिला दिया जा रहा है। इसकी जगह एमबीबीएस, आयुष और नर्सिंग पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने का प्रस्ताव दिया, ताकि एक ही दिन इतनी अधिक संख्या में उम्मीदवार परीक्षा देने से बच सकें। NTA ने समिति को बताया कि इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश सभी नीट स्कोर पर आधारित हैं और इसलिए, अलग-अलग परीक्षाएं संभव नहीं होंगी। हालांकि, संसदीय समिति से इस प्रस्ताव पर NTA ने कहा है कि वह सिर्फ परीक्षा आयोजक संस्था है। मेडिकल परीक्षा यानी NEET UG या अलग-अलग परीक्षा करवाने का फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ले सकता।