जांच की मांग नगांव/कालियाबोर : असम के नगांव जिले में डॉक्टर की पोस्टिंग और ड्यूटी को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कालियाबोर स्थित नलताली अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. चंदन शर्मा पर आरोप लगाया गया है कि अपनी निर्धारित पोस्टिंग वाली जगह पर ड्यूटी करने के बजाय वह नगांव के भोगेश्वरी फुकनानी सिविल अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दो साल से नगांव अस्पताल में ड्यूटी का आरोप
आरोपों के मुताबिक, डॉ. शर्मा की पोस्टिंग नलताली अस्पताल में है, लेकिन वह कथित तौर पर करीब दो वर्षों से नगांव भोगेश्वरी फुकनानी सिविल अस्पताल में काम कर रहे हैं। दावा किया गया है कि नगांव अस्पताल की आधिकारिक ड्यूटी सूची में उनका नाम भी दर्ज नहीं था। इस स्थिति ने दोनों अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती, ड्यूटी आवंटन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि किसी डॉक्टर की पोस्टिंग एक अस्पताल में है तो दूसरे अस्पताल में लंबे समय तक उनकी ड्यूटी किस व्यवस्था या अनुमति के तहत लगाई गई।
नाइट ड्यूटी के दौरान व्यवहार पर भी आरोप
डॉ. शर्मा पर नाइट ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने के भी आरोप लगाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि शराब के सेवन के बाद उन्होंने मरीजों और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी की। इतना ही नहीं, उन पर अस्पताल में एक हेल्थकेयर वर्कर के साथ कथित तौर पर मारपीट की कोशिश करने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इस संबंध में सामने आए दावों की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से नहीं हुई है।
दूसरे डॉक्टरों से पैसे लेने का भी दावा
आरोपों में सबसे गंभीर दावा यह है कि डॉ. शर्मा कथित तौर पर नगांव अस्पताल में ड्यूटी करने के लिए दूसरे डॉक्टरों से पैसे लेते थे। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में ड्यूटी आवंटन और चिकित्सकीय जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन आरोपों के संबंध में विभागीय स्तर पर कोई औपचारिक जांच शुरू की गई है या नहीं।
पोस्टिंग और ड्यूटी व्यवस्था पर उठे सवाल
पूरे मामले ने नलताली अस्पताल और भोगेश्वरी फुकनानी सिविल अस्पताल के बीच डॉक्टरों की पोस्टिंग और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर यह जांच का विषय है कि डॉ. शर्मा को नगांव सिविल अस्पताल में ड्यूटी करने की अनुमति किस स्तर से मिली थी और उनकी ड्यूटी आधिकारिक रिकॉर्ड में किस तरह दर्ज की गई। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभागीय जांच और संबंधित डॉक्टर का पक्ष सामने आना जरूरी है।