आइजोल : मिजोरम में पर्यटन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों यानी जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में 6,75,284 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। इनमें 6,64,197 घरेलू और 11,087 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बेहतर कनेक्टिविटी, नई रेल सेवा, इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने वाली पहल और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण पर्यटकों की संख्या में यह वृद्धि हुई है।
एक साल में तेजी से बढ़ा फुटफॉल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में मिजोरम में कुल 5,24,784 पर्यटक पहुंचे थे। इनमें 5,911 विदेशी पर्यटक थे। वहीं 2025-26 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 9,80,618 हो गई। अब 2026-27 के शुरुआती आठ महीनों में ही 6.75 लाख से अधिक पर्यटकों का पहुंचना राज्य में पर्यटन गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है। अधिकारियों ने पर्यटकों की बढ़ती संख्या के पीछे प्रमुख कारणों में बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर परिवहन संपर्क और मिजोरम के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के प्रचार को बताया है।
रेलवे ने बदली कनेक्टिविटी की तस्वीर
पर्यटन में बढ़ोतरी में 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को इस रेल लाइन का उद्घाटन किया था। इसके जरिए आइजोल क्षेत्र राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि रेल संपर्क बेहतर होने से मिजोरम तक पहुंच आसान हुई है और इसका असर पर्यटकों की आवाजाही पर भी दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार इसके साथ इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और ग्रामीण एवं सामुदायिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर विशेष जोर है, ताकि होटल, दुकान, टैक्सी, स्थानीय परिवहन और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिल सके।
पर्यटन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने पर जोर
पर्यटकों को बेहतर सेवाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने मिजोरम रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म पॉलिसी, 2020, मिजोरम (रजिस्ट्रेशन ऑफ टूरिस्ट ट्रेड) एक्ट, 2020 और इससे जुड़े नियम लागू किए हैं। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चर्चों और सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ भी काम कर रही है।
एंथुरियम फेस्टिवल से संस्कृति और पर्यटन का मेल
इसी पर्यटन अभियान के बीच मिजोरम में एंथुरियम फेस्टिवल का भी आयोजन किया गया। तीन दिवसीय यह आयोजन 1 से 3 अक्टूबर तक रेइक और ऐलावंग में हुआ। तीन साल के अंतराल के बाद लौटे इस महोत्सव में फूलों की खेती के साथ एडवेंचर टूरिज्म, मिजो संस्कृति, संगीत, पारंपरिक खेल, स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में ट्रेकिंग, गुफाओं की खोज, केबल फुटब्रिज, पारंपरिक खेल और अन्य साहसिक गतिविधियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहीं। यंग मिजो एसोसिएशन की विभिन्न शाखाओं और शिक्षण संस्थानों ने मिजो परंपराओं एवं संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
नए पर्यटन स्थलों पर सरकार का जोर
पर्यटन मंत्री लालघिंगलोवा हमार ने कहा है कि मिजोरम को बड़े पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए और प्रयास किए जाएंगे। सरकार प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के लिए नए पर्यटन स्थल विकसित करने के साथ विंटर फेस्टिवल, हनाहसिन कुट, लेइतलांगपुई म्यूजिक फेस्टिवल, साकावरमुइतुआई सनसेट और तलाइज़ावंग पैराडाइज जैसे आयोजनों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। हमार ने स्थानीय पर्यटन पर भी जोर देते हुए कहा कि केवल बाहर से लोगों का मिजोरम आना पर्याप्त नहीं है। राज्य के लोगों को भी मिजोरम के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करनी चाहिए। उनके अनुसार, राज्य के भीतर लोगों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।