आइजोल : मिजोरम में मादक पदार्थों की तस्करी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने तीन साल की व्यापक कार्ययोजना शुरू की है। राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह ने सोमवार को आइजोल स्थित विधानसभा एनेक्सी में इस कार्ययोजना का शुभारंभ किया। इसी कार्यक्रम में गृह मंत्री के. सपडांगा ने खावजॉल जिले के त्लांगमावी गांव को मिजोरम का पहला ड्रग-फ्री गांव घोषित किया और इसके प्रतिनिधियों को प्रमाणपत्र सौंपा। कार्यक्रम में मंत्री, वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी, चर्च प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठन और विद्यार्थी मौजूद थे। राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी और नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार के साथ स्थानीय समुदाय और नागरिक समाज को भी मिलकर काम करना होगा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को नशे से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई। राज्य की रणनीतिक स्थिति और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मिजोरम पर देश के दूसरे हिस्सों में मादक पदार्थों की आवाजाही रोकने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया।
तीन साल में परिणाम दिखने की उम्मीद
राज्यपाल ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अगले तीन वर्षों में इसके परिणाम दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने कार्ययोजना की सफलता के लिए सभी संबंधित पक्षों को सकारात्मक तरीके से साथ लेकर चलने की आवश्यकता बताई। उन्होंने त्लांगमावी को समुदाय की भागीदारी का उदाहरण बताते हुए गांव के लोगों के प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल ने यंग मिजो एसोसिएशन (YMA) के इस वर्ष के ‘रुइह्लो दो’ यानी ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ अभियान से भी नई कार्ययोजना के जुड़ाव का उल्लेख किया। गृह मंत्री के. सपडांगा ने कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों, चर्च, गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय बढ़ाएगी। सपडांगा के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच मिजोरम में NDPS Act के तहत 635 मामले दर्ज किए गए और 930 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 111 विदेशी नागरिक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस अवधि में 846 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए।
सिर्फ तस्करों तक सीमित न रहे जांच
गृह मंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों के मामलों में जांच केवल तस्करों और कैरियर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए। उन्होंने नशे की गिरफ्त में आए लोगों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और उन्हें सामान्य जीवन में लौटने के लिए आवश्यक सहायता देने पर भी जोर दिया। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान तेज करने और मादक पदार्थों की राज्य में आवाजाही रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी तथा अभियान मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
त्लांगमावी की पहल को मॉडल बनाने पर जोर
सपडांगा ने त्लांगमावी के निवासियों के सामूहिक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि गांव का ड्रग-फ्री दर्जा राज्य के दूसरे समुदायों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। उन्होंने अभिभावकों, चर्च, गैर-सरकारी संगठनों और सामुदायिक नेताओं से युवाओं को नशीले पदार्थों से बचाने के लिए सतर्क रहने और मिलकर काम करने की अपील की। कार्यक्रम में राज्यपाल ने सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन जेरिको और नशामुक्ति एवं पुनर्वास के लिए संचालित हुल्हलियाप शॉर्ट स्टे सेंटर का भी उल्लेख किया।