आइजोल : मिजोरम के कला एवं संस्कृति मंत्री सी. ललसाविवुंगा ने लोगों से अपनी मिजो पहचान को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित न रखने और उसे रोजमर्रा के जीवन में अपनाने की अपील की है। उन्होंने मिजो समाज की पारंपरिक मान्यताओं और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा उन्हें पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। चम्फाई जिले के बुंगजुंग गांव में शुक्रवार को कला एवं संस्कृति विभाग और एक वाईएमए (यंग मिजो एसोसिएशन) शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि संस्कृति केवल गीत और नृत्य तक सीमित नहीं है। सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य समुदाय की सांस्कृतिक नींव को मजबूत करना और लोगों में अपनी विरासत के प्रति समझ एवं सम्मान बढ़ाना भी होना चाहिए।
युवा पीढ़ी को मिजो पहचान से जोड़ने की अपील
ललसाविवुंगा ने विशेष रूप से युवाओं से अपनी मिजो पहचान और परंपराओं को समझने तथा उन पर गर्व करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों को केवल मनोरंजन के अवसर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता पैदा की जानी चाहिए। मंत्री ने मिजो समाज की पारंपरिक भावना ‘त्लावमंगैह्ना’ (Tlawmngaihna) को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता बताई। यह मूल्य निस्वार्थ सेवा, दूसरों की मदद और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना से जुड़ा है।
बुजुर्गों के सम्मान पर जताई चिंता
मंत्री ने आधुनिक समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान में आ रही कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परिवारों को बच्चों और युवाओं में बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए अधिक प्रयास करने चाहिए। पारंपरिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने ईमानदारी, कड़ी मेहनत और सदाचार जैसे मूल्यों को भी मजबूत करने की अपील की। साथ ही उन्होंने लोगों से आत्मनिर्भर बनने और मिजो समाज के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
ऐतिहासिक धरोहर सिकपुई लुंग के संरक्षण के लिए 1.2 लाख
कार्यक्रम के दौरान ललसाविवुंगा ने बुंगजुंग स्थित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मिजो धरोहर स्थल सिकपुई लुंग (Sikpui Lung) के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए सरकार की ओर से 1.2 लाख रुपये आवंटित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए निर्धारित राशि पर्याप्त नहीं हुई तो अतिरिक्त धनराशि भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री के अनुसार, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण मिजो समाज की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल स्मारकों और आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पारंपरिक मूल्यों को सामाजिक जीवन में बनाए रखना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।