आइजोल : मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जांच अधिकारियों से कहा कि वे भ्रष्ट गतिविधियों का पता लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानून में मिले अधिकारों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करें। साथ ही उन्होंने लंबित भ्रष्टाचार के मामलों का जल्द निपटारा करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री 3 सितंबर को आइजोल में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ पर आयोजित प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। विजिलेंस विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मिजोरम लोकायुक्त, एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) और मिजोरम पुलिस के अधिकारी शामिल हुए। लालदुहोमा ने जांच अधिकारियों से कहा कि वे अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल सख्ती के साथ, लेकिन कानून की सीमाओं के भीतर करें। उन्होंने जोर दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच बिना किसी डर या पक्षपात के होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को केवल उसके पद या प्रभाव के कारण नहीं बख्शा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विजिलेंस विभाग और अन्य सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए जांच एजेंसियों को संबंधित विभागों से पूरा सहयोग मिलना जरूरी है।
लोकायुक्त और ACB को मजबूत करने के कदम
लालदुहोमा ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शी और स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार-रोधी संस्थाओं को मजबूत कर रही है। सरकार ने ACB के लिए नए वाहनों की खरीद को मंजूरी दी है, जबकि लोकायुक्त के जांच अधिकारियों को भी वाहन सुविधा दी गई है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय कारणों से बंद किए गए ACB कर्मचारियों के विशेष प्रोत्साहन भत्ते को बहाल किया गया है। इसी तरह का प्रोत्साहन लोकायुक्त के जांच अधिकारियों के लिए भी उपलब्ध कराया गया है। भ्रष्टाचार-रोधी जागरूकता अभियानों के लिए अतिरिक्त धनराशि भी आवंटित की गई है। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि अभी भी कई जांच और मामले लंबित हैं। उन्होंने अधिकारियों से इन मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई केवल संस्थागत ढांचे को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई में भी तेजी दिखाई देनी चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी खिल्ली राम मीणा और राज्य के पुलिस महानिदेशक शरद अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।