आइजोल : मिजोरम में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चल रही बहस के बीच भाजपा विधायक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. हराहमो ने अलग रुख सामने रखा है। उन्होंने राज्य में UCC के प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि इसके कुछ प्रावधान अंतर-सामुदायिक विवाहों के मामलों में मिजो महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
मिजो महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा
आइजोल में सोमवार को भाजपा की मिजोरम इकाई के एक राजनीतिक सत्र को संबोधित करते हुए हराहमो ने कहा कि UCC को मिजोरम की जनजातीय आबादी और राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह, संपत्ति के अधिकार और परित्याग जैसे मामलों में समान कानूनी प्रावधान मिजो महिलाओं के लिए सुरक्षा मजबूत कर सकते हैं। हराहमो ने दावा किया कि राज्य में कुछ गैर-जनजातीय पुरुष एक से अधिक विवाह करते हैं और पहले से विवाहित होने के बावजूद मिजो महिलाओं से विवाह करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में महिलाओं के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए UCC के प्रावधानों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। यह उनके द्वारा बैठक में रखा गया पक्ष है।
‘कानूनों को समझे बिना विरोध न हो’
भाजपा नेता ने कहा कि मिजोरम में केंद्र सरकार की ओर से लाए जाने वाले नए कानूनों का कई बार इस आशंका के कारण विरोध किया जाता है कि उनसे राज्य के हित प्रभावित हो सकते हैं। उनके अनुसार, किसी कानून का विरोध या समर्थन करने से पहले उसके वास्तविक प्रावधानों और संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाना चाहिए। हराहमो ने कहा कि UCC पर भी इसी तरह विस्तृत चर्चा और परीक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने मिजोरम की जनजातीय पहचान और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसके संभावित प्रभावों पर विचार करने की बात कही।
जनजातीय आबादी के प्रावधानों पर भी जोर
हराहमो ने यह भी कहा कि जनजातीय समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की व्यवस्था कई संदर्भों में चर्चा का विषय रही है। उन्होंने उन राज्यों का उदाहरण दिया जहां UCC लागू किया गया है और जनजातीय आबादी के संबंध में अलग प्रावधान रखे गए हैं। मिजोरम में UCC को लेकर यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में इस विषय पर जनजातीय पहचान, मौजूदा प्रथाओं और विशेष संवैधानिक प्रावधानों को लेकर अलग-अलग चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं। हराहमो ने अपने बयान में इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए UCC के प्रावधानों की समीक्षा पर जोर दिया है। मिजोरम भाजपा अध्यक्ष के इस बयान से राज्य में UCC को लेकर चल रही चर्चा में एक नया पक्ष जुड़ा है। हालांकि, राज्य में UCC लागू करने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित संवैधानिक एवं विधायी प्रक्रिया के तहत ही होगा।