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मनरेगा कर्मचारियों ने 23 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल का किया ऐलान

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने 23 जून 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। यह हड़ताल श्री विजयपुरम स्थित मरीन हिल में ग्रामीण विकास, पंचायती राज संस्थाएं एवं शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के समक्ष आयोजित की जाएगी। यह निर्णय अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा लंबे समय से लंबित समेकित वेतन वृद्धि तथा सेवा संबंधी लाभों की मांग पर लगातार विलंब और ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद लिया गया है। मनरेगा कर्मचारी संघ ने बताया कि वर्ष 2024 से कर्मचारी लगातार ज्ञापन सौंपते आ रहे हैं, जिनमें अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कर्मचारियों की तर्ज पर वेतन संशोधन तथा बढ़ती महंगाई को देखते हुए वेतन में आवश्यक वृद्धि की मांग की गई है। संघ ने कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा बार-बार यह आश्वासन दिया जाता रहा कि प्रस्ताव "प्रक्रियाधीन" है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस लगातार हो रही देरी के कारण कर्मचारियों में असंतोष, आर्थिक दबाव और निराशा बढ़ती गई, जिसके चलते अंततः उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। संघ ने कहा कि वर्तमान वेतन संरचना, जिसमें अंतिम संशोधन वर्ष 2021 में किया गया था, मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। वर्ष 2008 में मनरेगा योजना शुरू होने के बाद से कर्मचारियों के वेतन में बहुत सीमित वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर कार्यक्रम अधिकारी का वेतन वर्ष 2008 में 15,000 रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2021 में केवल 25,000 रुपये हुआ। इसी प्रकार सहायक अभियंताओं का वेतन 12,000 रुपये से बढ़कर 20,000 रुपये, लेखाकारों का 9,000 रुपये से बढ़कर 16,000 रुपये तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर, ग्राम रोजगार सेवक और तकनीकी सहायकों का वेतन 8,000 रुपये से बढ़कर केवल 14,000 रुपये हुआ है। संघ का कहना है कि लगभग 18 वर्षों की सेवा के दौरान हुई यह वृद्धि कर्मचारियों के कार्यभार, जिम्मेदारियों और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बिल्कुल भी नहीं है।

इन समस्याओं के समाधान के लिए कर्मचारी संघ ने मांगपत्र प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम अधिकारियों का मासिक वेतन 50,000 रुपये, सहायक अभियंताओं का 45,000 रुपये, लेखाकारों का 40,000 रुपये तथा अन्य सभी कर्मचारियों का वेतन 35,000 रुपये निर्धारित करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष 5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, सरकारी नियमों के अनुसार टीए/डीए तथा सभी मनरेगा कर्मचारियों को ईपीएफ सुविधा प्रदान करने की भी मांग की गई है।संघ ने स्पष्ट किया कि वर्षों तक प्रतीक्षा करने और लगातार प्रशासन से अपील करने के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय अंतिम विकल्प के रूप में लिया गया है। हालांकि कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो वे तत्काल अपने कार्य पर लौटने के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी। संघ ने यह भी बताया कि वर्तमान में मनरेगा अधिनियम का नाम बदलकर तथा उसमें नए प्रावधानों और सुधारों को शामिल करते हुए वीबी-जी राम जी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) अधिनियम, 2025 लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों का कार्यभार पहले की तुलना में काफी अधिक बढ़ने की संभावना है तथा सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां और जवाबदेही भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाएगी। संघ ने कहा कि कुशल कर्मचारी होने के बावजूद उन्हें ऐसा वेतन दिया जा रहा है, जो डीआरएम तथा न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत निर्धारित दरों से भी कम है। इसे कर्मचारियों के साथ अत्यंत अन्यायपूर्ण और अनुचित व्यवहार बताया गया है। अंत में कर्मचारी संघ ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन से इस मामले में तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि निर्णय में और विलंब हुआ तो मनरेगा से संबंधित गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं तथा इस योजना पर निर्भर ग्रामीण लाभार्थियों को भी इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है।


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