शिलांग: मेघालय के खासी लोक संगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक धुनों को देश-दुनिया के मंच तक पहुंचाने की कोशिश में शिलांग का लोक-फ्यूजन बैंड ‘दा-ला-रिति’ लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2018 में गठित इस बैंड ने मेघालय की पहाड़ी परंपराओं और आधुनिक पश्चिमी संगीत के तत्वों को जोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल में बैंड ने जापान के ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में प्रस्तुति देकर खासी संगीत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया।
अपनी संस्कृति से जुड़ा है बैंड का नाम
‘दा-ला-रिति’ का नेतृत्व गायिका और गीतकार डालारिति ग्रेटेल खर्नाइओर करती हैं। बैंड के नाम में ही अपनी संस्कृति के अनुरूप आगे बढ़ने और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने का संदेश निहित है। बैंड का संगीत खासी लोक परंपराओं और पारंपरिक ध्वनियों पर आधारित है, जिसे आधुनिक संगीत शैली के साथ प्रस्तुत किया जाता है। खर्नाइओर ने ‘थिम्मेई’, ‘जिंगसेंग जिंगक्रॉ’ और ‘ख्लाम’ जैसे गीतों को लिखा और तैयार किया है। उनकी कोशिश खासी पारंपरिक संगीत को वैश्विक मंच पर ले जाने की है, लेकिन उसकी मूल सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखते हुए।
ओसाका के बाद देश के बड़े मंचों पर पहचान
बैंड की अंतरराष्ट्रीय यात्रा केवल ओसाका तक सीमित नहीं है। ‘दा-ला-रिति’ ने WAVES 2025, मुंबई, शिलांग लिटरेरी फेस्ट 2026 और शिलांग चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल 2025 में भी प्रस्तुति दी है। इसके अलावा असम के दरांग में आयोजित ट्राई-हिल्स फेस्टिवल और मेघालय के मावफलांग में मोनोलिथ फेस्टिवल में भी बैंड ने हिस्सा लिया। अगस्त 2026 में बैंड ने नयी दिल्ली में आयोजित साउंडस्केप्स ऑफ इंडिया सीजन-3 में भी हिस्सा लिया। इस मंच पर पूर्वोत्तर के संगीत को देश और अंतरराष्ट्रीय संगीत उद्योग से जुड़े लोगों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
युवा पीढ़ी को लोक संगीत से जोड़ने की कोशिश
खासी लोक संगीतकार और कला शिक्षक बंशाइलांग मुखिम के अनुसार, ‘दा-ला-रिति’ की यात्रा केवल पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि पारंपरिक संगीत को बदलते समय के साथ विकसित करते हुए युवा पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। मुखिम शिलांग स्थित श्लेम : इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक के संस्थापक और निदेशक भी हैं। संगीत शिक्षा, मार्गदर्शन और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए वह स्थानीय संगीत परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने पर काम करते हैं।
लोक, रॉक और समकालीन संगीत का संगम
बैंड में अलग-अलग संगीत पृष्ठभूमि वाले कलाकार शामिल हैं। गिटारवादक हैमिएह फावा रॉक, लोक और समकालीन संगीत से जुड़े रहे हैं। ड्रमर सनी मनभा कई कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं और उनके पास ट्रिनिटी कॉलेज लंदन से ग्रेड-8 क्लासिकल ड्रम्स की योग्यता है। बैंड में बासिस्ट ओमी फेरांडो हायोंग और फ्लूटिस्ट एवं परकशनिस्ट फ्रांगसंगी वाहलांग भी शामिल हैं। इस तरह समूह पारंपरिक खासी धुनों को आधुनिक वाद्ययंत्रों और समकालीन संगीत अभिव्यक्ति के साथ जोड़ता है।
इस साल पहला ईपी जारी करने की तैयारी
अब ‘दा-ला-रिति’ अपने पहले ईपी ‘हेर शा का थोंग’ को जारी करने की तैयारी में है। बैंड की योजना इस परियोजना के माध्यम से खासी संगीत को और व्यापक श्रोताओं तक पहुंचाने तथा युवाओं को लोक परंपराओं के साथ आधुनिक संगीत प्रयोगों से जोड़ने की है। बैंड भविष्य में अपनी डिजिटल मौजूदगी बढ़ाने के साथ संगीतकारों के लिए अधिक टिकाऊ पेशेवर अवसर तैयार करने पर भी ध्यान देना चाहता है। शिलांग से ओसाका तक की यात्रा इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है—खासी संगीत और संस्कृति को भौगोलिक सीमाओं से बाहर ले जाना, लेकिन उसकी जड़ों को कायम रखते हुए।