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मेघालय हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, श्री सीमेंट की गतिविधियां फिलहाल रुकीं

JSU की याचिका स्वीकार, राज्य सरकार ने कोर्ट में दिया हलफनामा 7 सितंबर को अगली सुनवाई

शिलांग: मेघालय हाई कोर्ट ने जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन (JSU) की ओर से श्री सीमेंट की गतिविधियों को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। इसके बाद राज्य सरकार ने अदालत को हलफनामे के जरिए भरोसा दिलाया है कि मामले की सुनवाई और जांच पूरी होने तक श्री सीमेंट से जुड़ी सभी गतिविधियां रोककर रखी जाएंगी। JSU ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी कानूनी सफलता बताया है। JSU के मुताबिक, राज्य सरकार के हलफनामे के बाद कंपनी फिलहाल परियोजना से जुड़े किसी तरह के नए ग्राउंडवर्क या अन्य संचालन को आगे नहीं बढ़ा सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होनी है।

फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव

राज्य सरकार ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी अदालत के समक्ष रखा है। यह समिति परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय, सामाजिक और कानूनी पहलुओं के साथ-साथ आपराधिक गड़बड़ी के आरोपों की भी जांच करेगी। हालांकि, JSU ने सरकार के नेतृत्व में होने वाली जांच पर सवाल उठाए हैं। यूनियन का कहना है कि जिन फैसलों और कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर ही सवाल उठ रहे हैं, उनकी जांच उसी सरकार द्वारा कराना निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा करता है। JSU ने इसके बजाय हाई कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है।

मानवाधिकार आयोग में भी मामला

श्री सीमेंट परियोजना से जुड़े विवाद की जांच मेघालय मानवाधिकार आयोग (MHRC) भी कर रहा है। आयोग ने JSU को पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तुत जांच रिपोर्टों पर अपना पक्ष 28 सितंबर तक रखने को कहा है। JSU ने इन रिपोर्टों को कथित तौर पर “अस्पष्ट और टालमटोल वाली” बताते हुए आरोप लगाया है कि इनमें प्रक्रियागत उल्लंघनों, प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शन के दौरान उनके साथ किए गए व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को पर्याप्त रूप से नहीं उठाया गया है।

मेडिकल रेस्क्यू टीम पर हमले का आरोप

यूनियन ने अपनी मेडिकल रेस्क्यू टीम पर कथित हमले का आरोप भी लगाया है। JSU का दावा है कि आपातकालीन सहायता पहुंचाने के दौरान उसकी एंबुलेंस के चालक और अन्य सदस्यों को एक हथियारबंद समूह ने निशाना बनाया। यूनियन का कहना है कि पुलिस रिकॉर्ड में भी कथित घटना का उल्लेख है और वह MHRC के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना जवाब दाखिल करेगी। JSU के शिक्षा सचिव बोचेरू मी पोहस्नेम ने कहा कि संगठन न्याय मिलने तक सभी कानूनी रास्ते अपनाता रहेगा।

जुलाई की पर्यावरणीय जनसुनवाई का विरोध

यह विवाद श्री सीमेंट की प्रस्तावित लुम सिरमन, एलाका नोंगख्लिह परियोजना से जुड़ा है। JSU ने अगस्त में मेघालय हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर 31 जुलाई 2026 को हुई पर्यावरणीय जनसुनवाई को चुनौती दी थी। यूनियन ने जनसुनवाई में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया था। फिलहाल हाई कोर्ट में मामला विचाराधीन है और अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। इस बीच श्री सीमेंट की परियोजना से जुड़ी गतिविधियों पर रोक रहने से पूर्वी जयंतिया हिल्स में परियोजना के भविष्य को लेकर कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।

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