इम्फाल : मणिपुर में युवाओं को संकटग्रस्त पैंगोलिन के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। इसके तहत छात्रों को पारंपरिक व्याख्यान देने के बजाय इंटरैक्टिव गेम्स और गतिविधियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा जा रहा है। हाल ही में उखरुल जिले के पेटिग्रेव कॉलेज में ‘प्ले फॉर पैंगोलिन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गैर-सरकारी संगठन एनवायरनमेंटल फ्रंटियर्स ऑफ गैल (ENFOGAL) ने पेटिग्रेव कॉलेज के जूलॉजी विभाग के सहयोग से किया। यह पहल ‘कम्युनिटी-लेड कंजर्वेशन ऑफ चाइनीज पैंगोलिन इन मणिपुर’ नामक व्यापक परियोजना का हिस्सा है, जिसे ग्रीनहब और रॉयल एनफील्ड का समर्थन प्राप्त है। आयोजकों ने छात्रों को पैंगोलिन की पारिस्थितिक भूमिका, उसके सामने मौजूद खतरों और संरक्षण में समुदाय की भूमिका समझाने के लिए खेल एवं भागीदारी आधारित गतिविधियों का इस्तेमाल किया। उद्देश्य युवाओं के बीच वन्यजीव संरक्षण को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाना तथा उन्हें अपने समुदायों में पैंगोलिन संरक्षण के संदेश का वाहक बनाना है। कार्यक्रम में खास तौर पर चीनी पैंगोलिन के संरक्षण पर जोर दिया गया। स्थानीय मेइतेई भाषा में इसे ‘शाफू’ या ‘साफू’ कहा जाता है। यह पपड़ीदार स्तनधारी प्रजाति गंभीर अस्तित्व संकट का सामना कर रही है और IUCN की ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ श्रेणी में शामिल है।
अवैध व्यापार सबसे बड़ा खतरा
पैंगोलिन का अवैध शिकार मुख्य रूप से उसके स्केल्स के लिए किया जाता है। इनका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा और कुछ लग्जरी उत्पादों में किया जाता है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनका अवैध व्यापार होता है। पैंगोलिन को राष्ट्रीय कानूनों के साथ-साथ CITES जैसे अंतरराष्ट्रीय संरक्षण तंत्र के तहत भी सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद यह दुनिया के सबसे अधिक अवैध रूप से तस्करी किए जाने वाले वन्यजीवों में शामिल है।
वैज्ञानिक जानकारी के साथ कार्रवाई भी जरूरी
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि किसी प्रजाति के तेजी से घटने का पता आम लोगों को चलने से पहले ही वह विलुप्ति के करीब पहुंच सकती है। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के फील्ड ऑफिसर चिंगरिसोरर रुमथाओ ने पैंगोलिन की नाजुक स्थिति पर चिंता जताते हुए संरक्षण के लिए केवल वैज्ञानिक जानकारी ही नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। केंद्रीय वन प्रभाग ने भी लोगों से वन्यजीव तस्करी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों को देने की अपील की है। आयोजकों का मानना है कि स्कूलों, स्थानीय समुदायों और संरक्षण संगठनों के बीच बेहतर सहयोग से मणिपुर की जैव विविधता और पैंगोलिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाया जा सकता है।