देश/विदेश

एक सप्ताह में उखड़ी NH-102A की नई सड़क

ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Krishna Das Parth

इंफाल : मणिपुर के पाओमाटा और चिलिवई फाइबुंग ब्लॉक के निवासियों तथा ग्राम अधिकारियों ने नेशनल हाईवे-102A पर ताडुबी और लोअर फाइबुंग गांव के बीच हाल में पूरा किए गए बिटुमिनस सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 60 किलोमीटर लंबे प्रभावित हिस्से में डामर बिछाने का काम पूरा होने के एक सप्ताह के भीतर ही सड़क की सतह खराब होने लगी। निवासियों और ग्राम अधिकारियों की ओर से जारी प्रेस बयान के मुताबिक, सड़क के कई हिस्सों में गड्ढे, दरारें, सतह की परत उखड़ने और पत्थरों के ढीले होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया और इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के मानकों की अनदेखी की गई।

सड़क की गुणवत्ता पर तकनीकी जांच की मांग

ग्रामीणों ने कहा कि NH-102A इस क्षेत्र की प्रमुख कनेक्टिविटी लाइफलाइन है और इसकी खराब स्थिति से यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों, ट्रांसपोर्टरों और दिहाड़ी मजदूरों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उनका आरोप है कि खराब सड़क की वजह से वाहनों को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, हाईवे के किनारे रहने वाले परिवारों को सड़क से उड़ने वाली धूल और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो बारिश और मॉनसून के दौरान इसकी स्थिति और खराब हो सकती है। इससे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था और संपर्क व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने सड़क की स्थिति को लेकर नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL), संबंधित ठेकेदारों और सब-कॉन्ट्रैक्टरों के समक्ष कई बार मौखिक और लिखित रूप से शिकायत की है। हालांकि, उनका आरोप है कि अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच की मांग

निवासियों और ग्राम अधिकारियों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने PWD, NHIDCL के वरिष्ठ अधिकारियों और स्वतंत्र थर्ड-पार्टी विशेषज्ञों को शामिल कर एक विशेष तकनीकी निरीक्षण टीम गठित करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि सड़क निर्माण में खामियां पाई जाती हैं तो संबंधित एजेंसी को अनुबंध में निर्धारित डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) के तहत ठेकेदार के अपने खर्च और जोखिम पर खराब हिस्सों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने का निर्देश दिया जाए।

दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग

निवासियों ने कथित लापरवाही, घटिया सामग्री या निर्माण मानकों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले ठेकेदारों और सब-कॉन्ट्रैक्टरों के खिलाफ अनुबंध की शर्तों और लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने भविष्य में NH-102A सहित क्षेत्र में होने वाले हाईवे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय इंजीनियरों तथा गांव स्तर पर गठित निगरानी समितियों की संयुक्त निगरानी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा है।

अक्टूबर तक कार्रवाई की समय-सीमा

ग्राम अधिकारियों और निवासियों ने प्रभावित सड़क हिस्से की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए अक्टूबर 2026 तक ठोस कार्रवाई की समय-सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यदि सड़क की स्थिति सुधारने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करने पर विचार करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आंदोलन के तहत NH-102A को अनिश्चितकाल के लिए बंद या अवरुद्ध करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इसे सड़क की गुणवत्ता और स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़ी अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रस्तावित लोकतांत्रिक कार्रवाई बताया है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों से मामले को गंभीरता से लेने तथा सड़क की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराकर दोष पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

SCROLL FOR NEXT