इंफाल : मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष और लंबे समय से कायम तनाव के बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता कीशम मेघचंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि राज्य को ऐसी सरकार की जरूरत है, जो किसी एक समुदाय के हित में काम करने के बजाय सभी समुदायों के प्रति समान और निष्पक्ष रवैया अपनाए। उन्होंने कहा कि हिंसा को किसी भी तरह का राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और हर व्यक्ति के लिए समान जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। मेघचंद्र ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि जब सत्ता में बैठे लोगों को “पक्षपाती या परस्पर विरोधी निष्ठाओं वाला” माना जाने लगता है, तो सरकार एक निष्पक्ष प्राधिकरण के रूप में अपनी विश्वसनीयता खो देती है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में प्रशासन के हर फैसले को समुदाय विशेष के नजरिए से देखा जाने लगता है और संघर्ष का स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशना कठिन हो जाता है।
‘मणिपुर सक्रिय ज्वालामुखी की तरह’
कांग्रेस नेता ने राज्य की मौजूदा स्थिति को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा, “मणिपुर आज एक सक्रिय ज्वालामुखी की तरह है।” उन्होंने कहा कि राज्य की गहरी समस्या यह है कि विभिन्न समुदायों के बीच राजनीतिक नेतृत्व को अलग-अलग प्रतिस्पर्धी हितों और सशस्त्र समूहों के विचारों से करीबी तौर पर जुड़ा हुआ माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस धारणा से एक खतरनाक स्थिति पैदा होती है, क्योंकि सरकार संघर्ष में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बजाय खुद संघर्ष का हिस्सा नजर आने लगती है। मेघचंद्र के अनुसार, जब प्रशासन पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं तो किसी भी सरकारी कार्रवाई की स्वीकार्यता प्रभावित होती है। इससे अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास और गहरा सकता है तथा शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मुश्किलें पैदा होती हैं।
हिंसा को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलने की नीति हो
कांग्रेस विधायक दल के नेता ने कहा कि राज्य में हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए। उन्होंने तीन बिंदुओं पर विशेष जोर दिया—“हिंसा को कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं, चुनिंदा तरीके से न्याय नहीं और सशस्त्र धमकी को किसी भी तरह की वैधता नहीं।” उन्होंने कहा कि कानून का इस्तेमाल किसी समुदाय विशेष के खिलाफ या किसी दूसरे समुदाय के पक्ष में दिखाई नहीं देना चाहिए। सभी पक्षों के लिए समान जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, तभी लोगों के बीच प्रशासन और न्याय व्यवस्था को लेकर भरोसा बहाल किया जा सकता है। मेघचंद्र ने कहा कि मणिपुर में स्थायी शांति के लिए सरकार को सभी सशस्त्र समूहों और सामुदायिक हितों से ऊपर उठकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि संघर्ष को केवल अनिश्चितकाल तक “मैनेज” करते रहना शांति स्थापित करने का स्थायी रास्ता नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “मणिपुर को ऐसी सरकार की जरूरत है, जो सभी सशस्त्र समूहों और सभी सामुदायिक हितों से ऊपर उठकर काम करे।” उनके मुताबिक, राज्य में स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए सबसे पहले शासन की निष्पक्षता में लोगों का विश्वास बहाल करना होगा।
हर पीड़ित को न्याय मिलने पर जोर
कांग्रेस नेता ने कहा कि शांति प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संघर्ष से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को न्याय का भरोसा कितना मिलता है। उन्होंने कहा कि पीड़ित की पहचान उसके समुदाय के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और न्याय के समान मानदंडों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि हर पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी समुदाय से संबंधित हो। उनके अनुसार, निष्पक्ष शासन, समान जवाबदेही और हिंसा के खिलाफ स्पष्ट नीति ही मणिपुर में लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास को कम करने और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने का आधार बन सकती है।