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कांगपोकपी के कैलेनजंग में फिर हिंसा तीन घरों में लगाई आग

अंधाधुंध गोलीबारी की आवाजें सुनाई दी

Krishna Das Parth

इंफाल : मणिपुर के कांगपोकपी जिले के कैलेनजंग गांव में बुधवार को एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। कुकी समुदाय के निवासियों के तीन घरों में आग लगा दी गई, जबकि दोपहर करीब 2 बजे गांव और आसपास के इलाकों में अंधाधुंध गोलीबारी की आवाजें सुनाई देने की खबर है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। सुरक्षा अधिकारियों ने तीन घरों में आग लगाए जाने की पुष्टि की है। हालांकि, ताजा घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आगजनी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान तत्काल नहीं हो सकी है और घटना के पीछे के कारणों की भी जांच की जा रही है।

CRPF की मौजूदगी के बावजूद आगजनी

कैलेनजंग में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की दो प्लाटून तैनात हैं। इनमें एक प्लाटून गांव में और दूसरी गांव के ठीक नीचे स्थित इलाके में तैनात है। बताया जा रहा है कि जिस समय तीन घरों में आग लगाई गई, उस दौरान CRPF के जवान इलाके में मौजूद थे। ऐसे में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद आगजनी की घटना कैसे हुई, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे कैलेनजंग और आसपास के क्षेत्रों में लगातार गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं। इससे पहले से ही लगभग सुनसान पड़े गांव में दोबारा हिंसा फैलने की आशंका बढ़ गई। सुरक्षा अधिकारियों को आगजनी में हथियारबंद लोगों के शामिल होने का संदेह है, हालांकि इस संबंध में स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

26 सितंबर के हमले के बाद सुनसान है गांव

कैलेनजंग सेनापति जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर पश्चिम में टाफौ गांव के ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। 26 सितंबर को हुए घातक हमले के बाद से गांव में अधिकांश लोग अपने घर छोड़ चुके हैं। 26 सितंबर को अज्ञात बंदूकधारियों ने गांव के मुखिया के घर को निशाना बनाकर गोलीबारी की थी। हमले में दो नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। बाद में घायलों में से एक ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या तीन हो गई। मृतक नागा समुदाय से थे। इस हमले के बाद इलाके में भय का माहौल बन गया था और सुरक्षा कारणों से बड़ी संख्या में लोगों ने गांव छोड़ दिया था। बुधवार को तीन घरों में आगजनी की घटना ने पहले से खाली पड़ी बस्तियों में संपत्ति की सुरक्षा और विस्थापित लोगों की वापसी को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक गोलीबारी और आगजनी की परिस्थितियों की जांच की जा रही है तथा घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान के प्रयास जारी हैं। घटना ने एक बार फिर उन संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष के बीच हथियारबंद समूहों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनी हुई है।

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