इंफाल : मणिपुर में जातीय तनाव के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर राजनीतिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री और नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के नेता लोसी डिखो ने कहा है कि यदि राज्य में सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो नौ नागा विधायक सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार कर सकते हैं। डिखो ने यह बात एक साक्षात्कार में कही। उन्होंने बताया कि उन्हें और कुकी समुदाय से आने वाली उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन को सरकार बनने के बाद विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित कर शांति बहाली की जिम्मेदारी दी गई थी। डिखो का आरोप है कि किपजेन ने नागा समुदाय से संपर्क करने या जारी हिंसा की निंदा करने के लिए पर्याप्त पहल नहीं की। डिखो ने आरोप लगाया कि किपजेन के पति से जुड़ा संगठन मौजूदा संघर्ष को बढ़ावा देने में शामिल है। उन्होंने कहा कि नागा विधायक ऐसी सरकार का हिस्सा बने रहने में कठिनाई महसूस करेंगे, जिसमें कथित तौर पर ऐसी सोच रखने वाले लोगों को संरक्षण मिल रहा हो। हालांकि, नेमचा किपजेन ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने नागा नागरिक समाज संगठनों से संवाद शुरू करने की कोशिश की थी, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। किपजेन ने डिखो के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि समुदायों के बीच संरचित संवाद की कमी ने स्थिति को और जटिल बनाया है।
SoO समझौता खत्म करने की मांग
डिखो ने कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को समाप्त करने की मांग भी दोहराई। उनका आरोप है कि समझौते के नियमों का जमीनी स्तर पर उल्लंघन हो रहा है। नौ नागा विधायकों ने इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर भी हस्तक्षेप की मांग की थी। पत्र में उन्होंने कुकी-जो नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और SoO समझौते को तत्काल समाप्त करने समेत कई मांगें रखी थीं। डिखो ने मणिपुर में मौजूदा तनाव की वजहों में भूमि विवाद और अवैध आव्रजन को भी शामिल किया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में उखरुल जिले के लिटन में एक कुकी युवक द्वारा कथित तौर पर एक तांगखुल नागा युवक पर हमला किए जाने के बाद नागा-कुकी तनाव तेजी से बढ़ा। उन्होंने कहा कि नागा समुदाय दोबारा संघर्ष नहीं चाहता। डिखो के मुताबिक, मैतेई-कुकी संघर्ष के दौरान नागा समुदाय ने तटस्थता बनाए रखी थी और बाद में शांति बहाली में योगदान देने के उद्देश्य से सरकार में शामिल हुआ।
कैबिनेट विस्तार में देरी पर भी सवाल
डिप्टी सीएम ने राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार में हो रही देरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के सामने यह मुद्दा उठाया है, लेकिन मुख्यमंत्री कथित तौर पर केंद्रीय नेतृत्व के ‘संकेत’ का इंतजार कर रहे हैं। डिखो का कहना है कि यदि सरकार के भीतर जिम्मेदारियों का बेहतर तरीके से बंटवारा होता और पूरी तरह काम करने वाली कैबिनेट होती, तो राज्य की स्थिति को संभालने में मदद मिल सकती थी। डिखो ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा सुरक्षा स्थिति बनी रहती है तो राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव कराना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार ने संकट के कानूनी और राजनीतिक समाधान के लिए चुनाव को टालने का फैसला किया हो सकता है। नौ नागा विधायकों की ओर से समर्थन वापस लेने की चेतावनी ऐसे समय आई है जब मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। इससे मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह की सरकार के सामने सुरक्षा के साथ-साथ गठबंधन प्रबंधन की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।