इंफाल : मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य में जनगणना की प्रक्रिया को लोगों की इच्छा और उनकी शिकायतों को ध्यान में रखते हुए टाल दिया है। मुख्यमंत्री ने यह बात मौजूदा मणिपुर विधानसभा के आठवें सत्र के पहले दिन सदन को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि राज्य में जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है। उन्होंने इस संबंध में पूर्ववर्ती सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। खेमचंद सिंह ने कहा कि अगस्त 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मणिपुर में एनआरसी लागू करने के संबंध में विधानसभा में एक प्रस्ताव रखा था। इसके बाद 2023 में इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजा गया था। उन्होंने कहा कि 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान भी इस प्रस्ताव की पुष्टि की गई और इसे दोबारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रपति शासन लागू होने और उसके बाद नयी सरकार के गठन के बाद अगस्त में राज्य के गृह विभाग ने दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि राज्य में जनगणना से पहले एनआरसी की प्रक्रिया कराई जानी चाहिए।
‘लोगों की शिकायतों की जानकारी केंद्र को दी गई’
खेमचंद ने कहा कि इन घटनाक्रमों के साथ-साथ राज्य के लोगों की शिकायतों और चिंताओं की जानकारी केंद्र सरकार को मिली। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य नेताओं ने राज्य में जनगणना की प्रक्रिया को टालने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मणिपुर के लोगों की इच्छा के अनुरूप लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “जहां तक यह सवाल है कि इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, तो मैं और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला व्यक्तिगत रूप से दिल्ली में शाह की अध्यक्षता में हुई उस बैठक में शामिल हुए थे, जिसमें यह फैसला लिया गया था।” मुख्यमंत्री सचिवालय ने 31 अगस्त को कहा था कि नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया टाल दी गई है। यह घटनाक्रम राज्य में जनगणना को लेकर जारी राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच सामने आया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनगणना से पहले एनआरसी को अद्यतन करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
एनआरसी को लेकर लंबे समय से मांग
मणिपुर में एनआरसी लागू करने और इसे जनगणना से पहले अद्यतन करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। समर्थकों का कहना है कि एनआरसी से राज्य में अवैध प्रवासन से जुड़ी चिंताओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग समुदायों में चिंताएं भी सामने आती रही हैं। मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिए बयान से स्पष्ट है कि सरकार फिलहाल जनगणना और एनआरसी के मुद्दे को आपस में जोड़कर देख रही है। राज्य सरकार का रुख है कि जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले लोगों की शिकायतों और एनआरसी से जुड़ी मांगों पर विचार किया जाना जरूरी है। मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद जनसांख्यिकी, नागरिकता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। ऐसे में जनगणना को टालने का फैसला राज्य की आगामी राजनीतिक प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।