मुंबईः टीसीएस (Tata Consultancy Services) नासिक ऑफिस से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जिनमें मुख्य आरोपी का कबूलनामा, डिजिटल सबूत और कंपनी परिसर के भीतर कथित साजिश का नेटवर्क शामिल है।
पुलिस जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी निदा खान ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म स्वीकार किया है। चार्जशीट में दर्ज बयान के अनुसार, उसने माना कि वह पीड़िता को अपने घर बुलाकर नमाज पढ़ना सिखाती थी।
पुलिस का दावा है कि आरोपी खुद जांच टीम को उन जगहों पर भी ले गई जहां कथित तौर पर पीड़िता को धार्मिक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी जाती थी।
जांच के दौरान पीड़िता के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में 37 इस्लामिक ऑडियो क्लिप्स मिलने का दावा किया गया है। इसके अलावा धार्मिक सामग्री से जुड़े कुछ ऐप्स और वीडियो लिंक भी बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, ये डिजिटल सामग्री कथित तौर पर आरोपियों के कहने पर फोन में इंस्टॉल कराई गई थी, जिसकी जांच साइबर विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है।
चार्जशीट में एक और गंभीर दावा सामने आया है कि टीसीएस ऑफिस की 7वीं मंजिल पर स्थित कैफे को कथित तौर पर साजिश के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि यहीं पर आरोपी दानिश, निदा खान और तौसिफ अत्तार बैठकर पीड़िता से जुड़े मामलों और कथित धर्मांतरण की रणनीति पर चर्चा करते थे।
पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी तौसिफ अत्तार ने उसे संतान न होने से जुड़ा आश्वासन देकर अजमेर में किसी धार्मिक व्यक्ति से मिलने की सलाह दी थी। पुलिस अब इस कथित “अजमेर कनेक्शन” की भी जांच कर रही है।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रमजान के दौरान पीड़िता पर रोजे रखने और धार्मिक नियमों का पालन करने का दबाव बनाया गया था। आरोप है कि आरोपियों ने उसे रोजे, सहरी और इफ्तार से जुड़ी जानकारी भी दी।
पुलिस की चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं, जिनमें पीड़िता, उसकी मां, टीसीएस कर्मचारी, POSH समिति के सदस्य और जांच अधिकारी शामिल हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।
टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाती है। कंपनी ने कहा है कि जिन कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं, उन्हें निलंबित कर दिया गया है और आंतरिक जांच भी जारी है।
यह मामला अब केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल सबूत, धार्मिक सामग्री और कार्यस्थल के भीतर कथित साजिश जैसे कई पहलुओं को जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल, पुलिस और SIT दोनों ही टीमों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे सामने आने की संभावना है।