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माइखुली में जमीन की रक्षा को महिलाओं ने संभाला मोर्चा

पूर्वजों से मिली जमीन को कर रही रक्षा

Krishna Das Parth

नांगपोह : असम-मेघालय अंतरराज्यीय सीमा विवाद के बीच री-भोई जिले के माइखुली क्षेत्र में भूमि और स्थानीय अधिकारों को लेकर तनाव एक बार फिर सामने आया है। ऑल खासी हिल्स आचिक फेडरेशन (AKHAF), माइखुली यूनिट की उपाध्यक्ष रिंकू मुनी आर. मारक ने स्थानीय लोगों की ओर से जमीन और क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम की ओर से आए लोगों और अधिकारियों की गतिविधियों से क्षेत्र के स्थानीय निवासियों की जमीन और सार्वजनिक परिसंपत्तियों को लेकर चिंता पैदा हुई है। मारक हाल ही में माइखुली फुटबॉल मैदान और स्कूल के निकट हुई घटना के दौरान उन महिलाओं में शामिल थीं, जिन्होंने मौके पर पहुंचे असम पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का सामना किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि असम की ओर से आए लोगों ने स्कूल के पीछे की दीवार को नुकसान पहुंचाने के बाद मैदान की ओर जाने वाले रास्ते को घेर दिया और प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया था। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद दोनों राज्यों के अधिकारियों और सुरक्षाबलों के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित किया गया। मीडिया से बातचीत में मारक ने कहा कि माइखुली के निवासी किसी तरह का विवाद पैदा नहीं करना चाहते, बल्कि अपने पूर्वजों से मिली जमीन की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जमीन, पहचान और भविष्य पर खतरा महसूस होता है तो ग्रामीण चुप नहीं रह सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोग माइखुली के किसी भी हिस्से पर बाहरी कब्जे की अनुमति नहीं देंगे। उनके मुताबिक, ग्रामीणों की मांग किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र और अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी है।

पुलिस तैनाती को लेकर सवाल

मारक ने दावा किया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने खानापारा में तैनात मेघालय पुलिसकर्मियों को इसकी सूचना दी थी। हालांकि, उनके आरोप के मुताबिक मौके पर मेघालय की ओर से तत्काल पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण स्थानीय महिलाओं को खुद स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने मेघालय सरकार से माइखुली में तत्काल पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और क्षेत्र में राज्य प्रशासन की मौजूदगी मजबूत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को अपनी जमीन और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता में नहीं रहना चाहिए।

शनिवार को तनाव के बाद दोनों ओर सुरक्षा

माइखुली में 19 सितंबर को तनाव उस समय बढ़ गया था, जब असम की ओर से आए 100 से अधिक लोगों के एक समूह के मैदान में प्रवेश करने और प्रवेश द्वार पर ताला लगाने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने ताला खोल दिया और दोनों पक्षों के बीच झड़प जैसी स्थिति बन गई। बाद में पिलांगकाटा और बशिष्ठ मंदिर आउटपोस्ट की पुलिस ने हस्तक्षेप किया तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। री-भोई के पुलिस अधीक्षक गिरी प्रसाद के अनुसार, घटना के बाद एहतियात के तौर पर सीमा के दोनों ओर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई। दोनों राज्यों के मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने बाद में स्थिति को नियंत्रण में और शांत बताया।

स्थायी पुलिस व्यवस्था की मांग

घटना के बाद जिरांग के विधायक और मेघालय के कैबिनेट मंत्री सोस्थेनेस सोहटुन ने भी माइखुली का दौरा कर स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती तथा सुरक्षा मजबूत करने की बात कही। उन्होंने माइखुली के नेताओं की मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा से मुलाकात कराने की बात भी कही है। स्थानीय संगठनों ने भी सीमा क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और माइखुली में सीमा से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट रूप से सुलझाने की मांग की है।

खासी-जैंतिया-गारो एकता की अपील

मारक ने माइखुली के मुद्दे को केवल एक गांव तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने खासी, जैंतिया और गारो समुदायों से मेघालय के क्षेत्रीय हितों और सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि माइखुली के लोग शांति चाहते हैं और किसी प्रकार के टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपनी जमीन और अधिकारों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह ग्रामीणों के साथ खड़ी रहेंगी और किसी भी दबाव या कथित डराने-धमकाने से प्रभावित नहीं होंगी। माइखुली में ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर असम-मेघालय सीमा के संवेदनशील इलाकों में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। दोनों राज्यों के अधिकारियों द्वारा स्थिति को नियंत्रित किए जाने के बावजूद स्थानीय संगठनों की ओर से स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और सीमा से जुड़े विवादों के स्पष्ट समाधान की मांग जारी है।

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