नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत की यात्रा पर आए केन्या के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। केन्या के नेशनल असेंबली के स्पीकर राइट ऑनरेबल (डॉ.) मोसेस एम. वेटांग’उला के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में दोनों देशों के बीच संसदीय संबंधों को और मजबूत करने, डिजिटल तकनीक, विकास साझेदारी और क्षमता निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
उपराष्ट्रपति ने भारत और केन्या के बीच घनिष्ठ संसदीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत प्रौद्योगिकी और डिजिटल समाधानों के क्षेत्र में अपने अनुभव को केन्या के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल तकनीक के माध्यम से संसद को पेपरलेस बनाने की दिशा में भारत के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने केन्या के नेशनल असेंबली परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने के प्रस्ताव की सराहना भी की।
राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2016 में केन्या यात्रा और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो की 2023 में भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति दी है।
भारत की विकास साझेदारी का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत ने केन्या में अनुदान सहायता के तहत कई परियोजनाएं पूरी की हैं। इनमें नैरोबी विश्वविद्यालय की महात्मा गांधी ग्रेजुएट लाइब्रेरी का नवीनीकरण तथा म्टोंगवे स्थित केन्याई नौसेना बेस में सीटी स्कैन संबंधी बुनियादी ढांचे की स्थापना शामिल है। उन्होंने इबोला वायरस के प्रकोप के दौरान भारत की सहायता का भी उल्लेख किया। उस समय भारत ने केन्या को 4.5 टन चिकित्सा सामग्री की पहली खेप उपलब्ध कराई थी।
उन्होंने कहा कि भारत केन्या की क्षमता निर्माण में भी लगातार सहयोग कर रहा है। भारत सरकार की ओर से केन्या को करीब 400 छात्रवृत्तियां दी जा रही हैं, जिनमें विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं। इसके अलावा केन्या के 20 राजनयिक भारत में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्तियां भी बढ़ाकर प्रतिवर्ष 100 कर दी गई हैं।
उपराष्ट्रपति ने भारत-केन्या सहयोग के तहत डिजिलॉकर पायलट परियोजना का भी उल्लेख किया। इस परियोजना के लिए समझौते पर नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने बताया कि भारतीय और केन्याई टीमें केन्या के लिए गति शक्ति परियोजना पर भी काम कर रही हैं।
राधाकृष्णन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए केन्या का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए भी केन्या से समर्थन मांगा।
भारत और केन्या के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और स्वाहिली तट के बीच सदियों से व्यापारिक मार्गों के माध्यम से संपर्क रहा है। उन्होंने केन्या से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस में शामिल होने की भी उम्मीद जताई।
उपराष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने जन-जन के संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि केन्या में भारतीय मूल के लोगों को देश की 44वीं जनजाति के रूप में मान्यता मिलना इन संबंधों की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने केन्याई प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच संसदीय संवाद और व्यापक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।