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खेती की जमीन पर औद्योगिक परियोजना, ग्रामीणों ने किया विरोध

Krishna Das Parth

कालियाबोर : असम के कालियाबोर इलाके में खेती की जमीन पर प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध सामने आया है। माथौखाट, बामुनी और बामुनी पाथर क्षेत्रों के निवासियों ने आरोप लगाया है कि कृषि भूमि पर एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण कृषि भूमि के साथ-साथ आसपास के रिहायशी इलाकों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

खेती की जमीन पर उद्योग लगाने का आरोप

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ कारोबारी समूह माथौखाट क्षेत्र में औद्योगिक इकाई स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह है कि प्रस्तावित परियोजना के लिए जिस जमीन का इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है, वह कृषि कार्य के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हैं। ऐसे में कृषि भूमि का औद्योगिक इस्तेमाल किए जाने से स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।

रिहायशी इलाकों पर असर की चिंता

स्थानीय निवासियों ने प्रस्तावित परियोजना से आसपास की बस्तियों पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि औद्योगिक इकाई स्थापित होने से क्षेत्र के मौजूदा पर्यावरण और रहन-सहन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, परियोजना से होने वाले संभावित प्रभावों को लेकर लगाए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। परियोजना की प्रकृति, जमीन का आधिकारिक उपयोग और संबंधित विभागों की मंजूरी के बारे में भी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

प्रशासन पर कारोबारी समूहों का साथ देने का आरोप

ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि प्रशासन प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयासों में संबंधित कारोबारी समूहों का कथित तौर पर समर्थन कर रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में ग्रामीणों के आरोपों की पुष्टि के लिए प्रशासन का पक्ष और परियोजना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

स्कूल या अस्पताल बनाने की मांग

स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि प्रस्तावित जमीन पर कोई सार्वजनिक परियोजना विकसित की जानी है तो वहां स्कूल या अस्पताल बनाया जाना अधिक उपयोगी होगा। उनका तर्क है कि ऐसी सुविधाओं से आसपास के गांवों के लोगों को सीधे लाभ मिलेगा और क्षेत्र की बुनियादी जरूरतें भी पूरी होंगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे औद्योगिक विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका विरोध कृषि भूमि और रिहायशी क्षेत्रों की कीमत पर परियोजना स्थापित किए जाने को लेकर है।

आपत्ति नजरअंदाज होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया और प्रस्तावित परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रही, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय लोगों की चिंताओं, कृषि भूमि के महत्व और रिहायशी क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव का आकलन करना चाहिए। फिलहाल मामले में परियोजना की आधिकारिक स्थिति और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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