राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को निर्देश
नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को ‘विदेश में नौकरी दिलाने’ के नाम पर हो रही मानव तस्करी के ‘खतरनाक चलन’ आगाह किया है। मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे घोटालों से निपटने के लिए ‘विशेष अभियान’ चलाएं, जिनमें लोगों को ज्यादा वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर ‘साइबर फ्रॉड सेंटरों’ में फंसाया जाता है।
AHTU को मजबूत करने की सलाह
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को जारी निर्देश में राज्य पुलिस, साइबर सेल, श्रम विभाग व प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन को शामिल करते हुए ‘विशेष कार्रवाई’ करने को कहा है। निर्देश में मानव तस्करी रोधी इकाइयों (AHTU), जिन्हें निर्भया फंड के तहत वित्तीय सहायता मिली है, को मजबूत करने और पीड़ितों की पहचान के तरीकों में सुधार करने को कहा गया है। साथ ही तस्करी नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की सलाह दी गयी है।
BNS, BNSS और BSA के अधिक उपयोग का आह्वान
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के अधिक उपयोग का आह्वान किया है। मंत्रालय ने जांच अधिकारियों से विशेष रूप से संगठित अपराध से संबंधित BNS की धारा 111 की प्रासंगिकता की जांच करने के लिए कहा है। इसके दायरे में मानव तस्करी भी शामिल है। बच्चों और एक से अधिक पीड़ितों से जुड़े मामलों सहित मानव तस्करी के मामलों में BNS की धारा 143 और 144 को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया गया है। धारा 143 के तहत धमकी, बल, जबरदस्ती, अपहरण, धोखाधड़ी, छल, सत्ता के दुरुपयोग या प्रलोभन जैसे तरीकों का उपयोग करके शोषण के लिए किसी व्यक्ति की भर्ती करने, उसे ले जाने, छिपाने, स्थानांतरित करने या प्राप्त करने को मानव तस्करी के रूप में परिभाषित किया गया है। इस कानून में बच्चों या एक से अधिक बच्चों की तस्करी किए जाने पर कठोर दंड का प्रावधान है।
नेटवर्क के फाइनेंसरों, ऑर्गनाइजरों की पहचान पर जोर
गृह मंत्रालय ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे अपना ध्यान निचले स्तर के अपराधियों से आगे बढ़ाकर जांच पर केंद्रित करें और मानव तस्करी नेटवर्क के फाइनेंसर (वित्तपोषक), ऑर्गनाइजर (संचालकों) और अन्य सदस्यों की पहचान करें। साथ ही मंत्रालय ने ऐसे आपराधिक अभियानों से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें जब्त करने पर भी जोर दिया है। इस निर्देश में डिजिटल साक्ष्यों को केंद्रीय भूमिका दी गयी है। जांच अधिकारियों को एन्क्रिप्टेड चैट, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड, भौगोलिक स्थिति की जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए कहा गया है।
एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान
लेबर ट्रैफिकिंग, विशेष रूप से ईंट भट्ठों, पत्थर खदानों, कपड़ा और घरेलू काम जैसे क्षेत्रों में, पर नजर व एक्शन के लिए AHTU, पुलिस, श्रम विभागों और अन्य एजेंसियों के बीच औपचारिक तालमेल पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से उन पुरुषों और लड़कों पर ध्यान देने को कहा गया है जिन्हें मजदूरी कराने के लिए तस्करी का शिकार बनाया जा सकता है। तस्करी के मार्गों और संवेदनशील इलाकों की पहचान करने के लिए CCTNS और Cri-MAC जैसे डेटाबेस का उपयोग करने के निर्देश दिये गये हैं।
साइबर पेट्रोलिंग बढ़ाने का निर्देश
राज्य पुलिस से साइबर पेट्रोलिंग बढ़ाने के लिए भी कहा गया है ताकि ग्रूमिंग पैटर्न (बच्चों को फुसलाने के तौर-तरीके), नौकरी के फर्जी विज्ञापनों और संदिग्ध भर्ती गतिविधियों का पता लगाया जा सके। निर्देश में कहा गया है कि बचाये गये व्यक्तियों और अज्ञात नाबालिगों का ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल से मिलान करने के लिए उचित मामलों में राष्ट्रीय स्वचालित चेहरा पहचान प्रणाली (NAFRS) का उपयोग किया जाये।