होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई परमिट व्यवस्था लागू 
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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान की नई शर्त, सैकड़ों जहाजों ने मांगी अनुमति

नई फारस गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी के तहत स्थायी अनुमति व संभावित भारी शुल्क की तैयारी, विरोधी देशों के जहाजों पर रोक के संकेत और अमेरिका की कड़ी आपत्ति से तनाव गहराया

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई परमिट व्यवस्था लागू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 300 से अधिक जहाज इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरानी अधिकारियों के पास आवेदन कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि ईरान द्वारा गठित नई संस्था फारस गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) इस व्यवस्था को संचालित कर रही है। संस्था का दावा है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक स्थायी अनुमति और शुल्क प्रणाली विकसित की जा रही है।

तेल टैंकरों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी

रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुमति के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश जहाज तेल टैंकर हैं। इनमें बड़ी संख्या उन जहाजों की है जो खाड़ी क्षेत्र से निकलकर एशियाई देशों की ओर जा रहे हैं। विशेष रूप से चीन और भारत जाने वाले जहाजों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है, क्योंकि दोनों देश खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात करने वाले प्रमुख बाजार हैं।

शुल्क को लेकर अभी भी सस्पेंस

ईरानी अधिकारियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों को कितना शुल्क देना होगा। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया गया है कि बड़े तेल टैंकरों से लाखों डॉलर तक वसूले जा सकते हैं।

कुछ देशों के जहाजों पर प्रतिबंध

नई नीति के तहत ईरान ने संकेत दिया है कि जिन देशों को वह अपने विरोधी या प्रतिद्वंद्वी मानता है, उनसे जुड़े जहाजों को अनुमति देने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वहीं मित्र और सहयोगी देशों के जहाजों को प्राथमिकता मिलने की बात कही गई है।

अमेरिका ने जताई आपत्ति

इस कदम पर अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी प्रशासन ने जहाज मालिकों और शिपिंग कंपनियों को सलाह दी है कि वे ईरान को किसी भी प्रकार का शुल्क भुगतान न करें। साथ ही, इस व्यवस्था को संचालित करने वाली संस्था पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में गिना जाता है और यहां होने वाला कोई भी बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों को सीधे प्रभावित कर सकता है।

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